Chhattisgarh High Court ruling on privacy vs fair trial in family court

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राजधानी रायपुर से सटे आरंग क्षेत्र के निसदा गांव में चल रहे अवैध उत्खनन और महानदी में कचरा डंप करने के मामले में राज्य सरकार सहित अन्य पक्षों से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए खनिज विभाग के सचिव को व्यक्तिगत शपथ पत्र पेश करने का निर्देश दिया है।

यह मामला सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा महानदी के प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन से जुड़ा है। हाई कोर्ट का यह कड़ा रुख स्थानीय पर्यावरण, जल संरक्षण और खनिज संपदा के न्यायोचित उपयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो भविष्य में ऐसे अवैध कार्यों पर रोक लगाने में सहायक होगा।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत लीज एरिया के बाहर किसी भी तरह के उत्खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 फरवरी की तारीख निर्धारित की गई है। आरंग के निवासी ओम प्रकाश सेन ने हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका दायर की है। याचिका में बताया गया है कि निसदा गांव में फ्लैग स्टोन और चूना पत्थर के उत्खनन के लिए 15 लोगों को लीज स्वीकृत की गई थी।

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याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन लीजधारकों ने स्वीकृत क्षेत्र से पांच गुना अधिक जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर खुदाई की है। इसके साथ ही, उत्खनन से निकलने वाले अनुपयोगी पदार्थों और कचरे को सीधे महानदी में डंप किया जा रहा है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है और जलीय जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

बता दें कि खनिज विभाग के सचिव को व्यक्तिगत शपथ पत्र के माध्यम से कोर्ट में जवाब प्रस्तुत करना होगा। हाई कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार और संबंधित विभागों पर अवैध उत्खनन को रोकने तथा महानदी को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।