रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में शुक्रवार को छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की 16वीं बैठक मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव हमारी प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं और उनके संरक्षण के लिए न्यूनतम हस्तक्षेप का सिद्धांत अपनाते हुए विकास कार्यों को गति दी जाए।

बता दें छत्तीसगढ़ के टाइगर रिजर्व और अभ्यारण्यों में विकास कार्यों (जैसे सड़क, ऑप्टिकल फाइबर) के प्रस्ताव अक्सर राष्ट्रीय बोर्ड के पास लंबित रहते हैं। इस बैठक में स्थायी समिति के गठन को मंजूरी मिलने से अब इन क्षेत्रों में वैधानिक मंजूरियों का निपटान तेजी से होगा, जिससे वनांचल में रहने वाले ग्रामीणों तक बुनियादी सुविधाएं जल्द पहुंच सकेंगी और वन्यजीव प्रबंधन भी बेहतर होगा।

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (Standing Committee) का गठन रहा। इस समिति की अध्यक्षता वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप करेंगे और इसमें 11 अन्य सदस्य शामिल होंगे। यह समिति बोर्ड की बैठकों के बीच के अंतराल के दौरान आने वाले जरूरी प्रस्तावों पर त्वरित निर्णय लेगी, जिससे महत्वपूर्ण वन्यजीव परियोजनाओं में देरी नहीं होगी।

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मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वनों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और युवाओं को वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जनभागीदारी से जोड़ा जाए। उन्होंने अवैध शिकार और अन्य गतिविधियों पर रोक के लिए सतत निगरानी पर भी जोर दिया।

राज्य बोर्ड से अनुमोदित इन प्रस्तावों को अब राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (National Board for Wildlife) के पास अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा। स्थायी समिति के सक्रिय होने के बाद, छत्तीसगढ़ में वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़ी फाइलें अब विभागों के बीच लंबे समय तक नहीं रुकेंगी, जिससे संरक्षण और विकास के बीच बेहतर संतुलन बनेगा।