टीआरपी डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज असम के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे। उनके इस दौरे की शुरुआत ने ही चीन को कड़ा संदेश दे दिया है, जब पीएम का विमान सीधे चीन सीमा के पास डिब्रूगढ़ में बनी पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर लैंड हुआ। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनेवाल ने रणभूमि के पास तैयार इस नई शक्ति केंद्र पर उनका स्वागत किया।
यह न केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, बल्कि युद्ध या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए ‘गेम-चेंजर’ है। सीमा के इतने करीब फाइटर जेट्स का उतरना भारत की आक्रामक रक्षा नीति को दर्शाता है।
चीन सीमा पर भारत का ‘ब्रह्मास्त्र’: ELF की खासियतें
मोरन बाइपास के पास बनी यह सुविधा उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर तैयार की गई है, लेकिन सामरिक दृष्टि से यह कहीं अधिक अहम है। यह स्ट्रिप 40 टन के लड़ाकू विमानों और 74 टन के विशाल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (जैसे C-130J सुपर हरक्यूलिस) का भार सहने में सक्षम है। इस पर सेना के विमानों के साथ-साथ नागरिक विमान भी आपात स्थिति में लैंड कर सकेंगे। उद्घाटन के दौरान फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट विमानों और हेलिकॉप्टरों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन कर आसमान में गर्जना की।
इन 5 जगहों पर भी है ऐसी सुविधा
भारत अब अपनी सीमाओं और मुख्य एक्सप्रेस-वे को ‘रनवे’ में बदल रहा है। डिब्रूगढ़ के अलावा ये सुविधाएं यहाँ मौजूद हैं।
उत्तर प्रदेश: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे
उत्तर प्रदेश: पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे
ओडिशा: बालासोर
आंध्र प्रदेश: नेल्लोर
राजस्थान: बाड़मेर (NH-925A)
गुवाहाटी को ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ की सौगात
रक्षा के साथ-साथ पीएम मोदी ने असम के विकास को भी नई गति दी है। वे गुवाहाटी में 3000 करोड़ रुपए की लागत से बने 6-लेन वाले कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन करेंगे। यह पुल गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करेगा। यह पुल भूकंपीय सुरक्षा (Seismic Safety) के नवीनतम मानकों पर बनाया गया है, जो पूर्वोत्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है।
चुनाव से पहले मोदी का ‘मास्टरस्ट्रोक’
असम में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। पिछले 3 महीनों में पीएम का यह तीसरा दौरा है। जानकारों का मानना है कि विकास परियोजनाओं के जरिए बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। वहीं, सामरिक प्रोजेक्ट्स के जरिए ‘राष्ट्रवाद’ के एजेंडे को भी धार दी जा रही है।


