टीआरपी डेस्क। रमजान के पवित्र महीने के दौरान कुवैत सरकार ने भीख मांगने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। कुवैत के आंतरिक मंत्रालय ने सख्त कार्रवाई करते हुए 11 प्रवासियों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें अब वापस उनके देश भेजने (Deport) की तैयारी की जा रही है। विशेष बात यह है कि खाड़ी के इन देशों में गिरफ्तार होने वाले भिखारियों में से 90 प्रतिशत पाकिस्तानी नागरिक हैं, जिससे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी किरकिरी हो रही है।
कुवैत और अन्य खाड़ी देश (UAE, सऊदी अरब, कतर) अपने विजन को आधुनिक और कानून-सम्मत बनाना चाहते हैं। भीख मांगना यहाँ कानूनी अपराध है। पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली के कारण वहां के नागरिक ‘विजिट वीजा’ लेकर भीख मांगने इन देशों में पहुंच रहे हैं, जिससे द्विपक्षीय संबंधों पर भी असर पड़ रहा है। कुवैत के जनरल डिपार्टमेंट ऑफ सिक्योरिटी रिलेशन एंड मीडिया के मुताबिक मस्जिदों के बाहर भीख मांगते हुए इन लोगों को पकड़ा गया है। गिरफ्तार किए गए कई लोग विजिट वीजा और फैमिली रेजिडेंस वीजा पर कुवैत आए थे। कुवैत सरकार अब उन कंपनियों और स्पॉन्सर्स (Sponsors) की भी जांच कर रही है, जिन्होंने इन लोगों को विजिट वीजा पर बुलाया था। रमजान में मस्जिदों और बाजारों की निगरानी के लिए कुवैत ने विशेष दस्ते तैनात किए हैं।
पाकिस्तान ने किया स्वीकार
पिछले साल पाकिस्तान की सीनेट की एक कमेटी ने खुद कबूल किया था कि खाड़ी देशों की जेलों में बंद भिखारियों में अधिकांश उनके नागरिक हैं। सऊदी अरब और यूएई जैसे देश पाकिस्तान सरकार से बार-बार शिकायत कर चुके हैं कि उनके नागरिक ‘उमरा’ या ‘विजिट’ के नाम पर भीख मांगने आते हैं। कमेटी ने माना कि इसी छवि के कारण अब खाड़ी देशों में पाकिस्तानियों को नौकरी और वीजा मिलने में दिक्कतें आ रही हैं। पाकिस्तान में महंगाई और बेरोजगारी के चलते संगठित गिरोह लोगों को भीख मांगने के लिए अरब देशों में भेज रहे हैं। इसके साथ ही स्पॉन्सरशिप देने वाली कंपनियों पर भी भारी जुर्माना लगाया जाएगा।



