टीआरपी डेस्क। खगोल विज्ञान और धार्मिक दृष्टि से कल यानी 17 फरवरी 2026 का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। कल साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण होगा, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘रिंग ऑफ फायर’ का नाम दिया है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य के बीचों-बीच आकर उसे लगभग 96 प्रतिशत तक ढक लेगा, जिससे आसमान में सूर्य एक चमकते हुए छल्ले की तरह नजर आएगा। यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगने जा रहा है, जिसका ज्योतिषीय महत्व भी काफी अधिक माना जा रहा है।
क्या भारत में दिखाई देगा यह ग्रहण?
भारतीय दर्शकों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है कि 17 फरवरी का यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से दक्षिणी अफ्रीका (जिम्बाब्वे, नामीबिया, जाम्बिया), अंटार्कटिका, दक्षिण अमेरिका (चिली, अर्जेंटीना) और मॉरीशस जैसे देशों में नजर आएगा।
सूतक काल को लेकर न हों परेशान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल तभी प्रभावी माना जाता है जब ग्रहण उस क्षेत्र में दिखाई दे। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, इसलिए यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिर के कपाट खुले रहेंगे और नियमित पूजा-पाठ में कोई बाधा नहीं आएगी। भले ही यह ग्रहण भारत में न दिखे, लेकिन जो लोग इसे ऑनलाइन या उन देशों में देख रहे हैं जहाँ यह दिखाई देगा, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। “सूर्य ग्रहण को सीधे नग्न आंखों से देखना रेटिना को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसे केवल सर्टिफाइड सोलर फिल्टर या खास चश्मों (Eclipse Glasses) से ही देखना चाहिए।
ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?
भले ही सूतक मान्य न हो, लेकिन आध्यात्मिक शांति के लिए कई लोग कुछ नियमों का पालन करते हैं। मंत्र जाप (ॐ नमः शिवाय), ध्यान और योग करना श्रेष्ठ है। ग्रहण के बाद दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। ग्रहण काल में भोजन पकाने या नुकीली चीजों (कैंची, चाकू) के इस्तेमाल से परहेज की सलाह दी जाती है, खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए। यदि आप इस अद्भुत घटना को देखना चाहते हैं, तो नासा (NASA) या विभिन्न खगोलीय वेबसाइट्स पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं।


