बिलासपुर। गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGU) में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला अब एक बेहद दिलचस्प और पेचीदा मोड़ पर खड़ा हो गया है। बिलासपुर हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने एक शपथपत्र पेश कर यह सनसनीखेज दावा किया है कि संस्थान के सभी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित किया जा चुका है।
यूनिवर्सिटी ने अदालत को आश्वस्त किया कि नियमितीकरण की प्रक्रिया न केवल पूरी हो चुकी है, बल्कि इससे संबंधित आवश्यक दस्तावेज भी कोर्ट के रिकॉर्ड में जमा कर दिए गए हैं। हालांकि, इस दावे ने कर्मचारियों के बीच भारी असमंजस पैदा कर दिया है क्योंकि उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस संबंध में कोई भी आधिकारिक पत्र या लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
बता दें कि यदि यूनिवर्सिटी का दावा सही निकलता है, तो यह कर्मचारियों की 18 साल लंबी कानूनी लड़ाई की जीत होगी, लेकिन आदेशों को गोपनीय रखना प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े करता है।
यह मामला पिछले 18 वर्षों (2008 से) लंबित है। इसमें तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारी शामिल हैं, जो यूनिवर्सिटी के केंद्रीय दर्जा प्राप्त करने के बाद से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस फैसले का असर प्रदेश के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के दैनिक वेतनभोगियों पर भी पड़ सकता है।
बता दें कि 2008 में यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति प्रो. एल.एम. मालवीय ने राज्य शासन के निर्देशों का पालन करते हुए तृतीय और चतुर्थ वर्ग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया था। मामला तब उलझ गया जब 2009 में इस विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा प्राप्त हुआ और नए प्रबंधन ने पुराने आदेशों को सिरे से खारिज कर दिया।
इसके बाद यह लड़ाई हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, जहां हर बार अदालतों ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया। बावजूद इसके, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जब आदेशों का पालन नहीं किया, तब वर्तमान अवमानना याचिका के माध्यम से मामला दोबारा अदालत की चौखट पर पहुंचा।
अब इस मामले में हाईकोर्ट ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे 24 अप्रैल तक विस्तृत जवाब प्रस्तुत करें और यह सुनिश्चित करें कि नियमितीकरण के साथ मिलने वाले सभी लाभ कर्मचारियों तक पहुंच रहे हैं या नहीं। कर्मचारियों का तर्क है कि यदि वे कागजों में नियमित हो चुके हैं, तो उन्हें वेतनमान और अन्य सुविधाओं का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है। अब इस मामले की सुनवाई 24 अप्रैल को होगी।


