रायपुर। राजधानी के नवा रायपुर स्थित तूता इलाके में प्रस्तावित फिल्म सिटी निर्माण का विरोध अब तेज हो गया है। फिल्म सिटी के लिए करीब 1500 पेड़ों को काटे जाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने आज एक बेहद अनोखा और आक्रामक प्रदर्शन किया। पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता जमीन पर खोदे गए गड्ढों में उतर गए और सरकार के इस फैसले के खिलाफ नारेबाजी की।

कांग्रेस का तर्क है कि नवा रायपुर को एक ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया गया है। एक साथ 1500 परिपक्व पेड़ों की कटाई से न केवल स्थानीय पर्यावरण और तापमान पर असर पड़ेगा, बल्कि यह वन्यजीवों के आवास को भी प्रभावित करेगा।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता उन स्थानों पर बने गड्ढों में उतर गए जहां निर्माण कार्य के लिए पेड़ों को हटाया जाना है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार विकास के नाम पर हरियाली का कत्ल कर रही है। तूता क्षेत्र, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, वहां फिल्म सिटी के नाम पर कंक्रीट का जंगल खड़ा करने की कोशिशों का विरोध स्थानीय स्तर पर भी शुरू हो गया है।

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छत्तीसगढ़ सरकार नवा रायपुर में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर फिल्म सिटी का निर्माण कर रही है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि इसके लिए किसी अन्य वैकल्पिक जमीन की तलाश करने के बजाय फलते-फूलते पेड़ों को काटना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि फिल्म सिटी का नक्शा बदला जाए या इसे ऐसी जगह शिफ्ट किया जाए जहां पेड़ों की बलि न देनी पड़े।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करना भाजपा सरकार की नीति बन गई है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हसदेव के जंगलों में हजारों पेड़ों की बलि देने के बाद अब सरकार की नजर माना-तूता की हरियाली पर है।

विपक्ष का कहना है कि फिल्म सिटी के निर्माण के लिए किसी अन्य बंजर या वैकल्पिक जमीन का चयन किया जा सकता था, लेकिन जानबूझकर 1500 पेड़ों को काटने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस ने दो टूक शब्दों में कहा है कि विकास के नाम पर छत्तीसगढ़ के फेफड़ों को छलनी करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन ने चेतावनी दी है कि यदि पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो यह आंदोलन केवल नवा रायपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे प्रदेश में चिपको आंदोलन की तर्ज पर लड़ा जाएगा। अब देखना होगा कि शासन इस विरोध के बाद फिल्म सिटी के प्रोजेक्ट में कोई बदलाव करता है या नहीं।