CGPSC State Service Prelims Exam 2026 Chhattisgarh

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2021-22 में हुई CGPSC भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। भाजपा नेता गौरी शंकर श्रीवास ने उद्योग विभाग में बायलर इंस्पेक्टर की भर्ती को नियम विरुद्ध बताते हुए लोक सेवा आयोग के तीन सदस्यों को हटाने की मांग की है। इनकी नियुक्ति कांग्रेस पार्टी की सत्ता के दौरान की गई थी।

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2021-22 के दौरान आयोजित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला उद्योग विभाग में बायलर इंस्पेक्टर पद पर हुई नियुक्ति से जुड़ा है। भाजपा नेता गौरी शंकर श्रीवास ने इस संबंध में राज्यपाल को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए एक अभ्यर्थी को अनुचित तरीके से नियुक्ति दी गई।

ओवर एज के बावजूद दी गई नियुक्ति

गौरी शंकर श्रीवास के अनुसार, उद्योग विभाग में बायलर इंस्पेक्टर पद के लिए कानन वर्मा नामक अभ्यर्थी की नियुक्ति की गई, जबकि वह आयु सीमा से अधिक (ओवर एज) थे। उनका कहना है कि भर्ती नियमों के तहत निर्धारित आयु सीमा का पालन अनिवार्य है, लेकिन संबंधित मामले में नियमों को दरकिनार कर चयन किया गया। श्रीवास ने इसे न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि गंभीर अनियमितता बताया है।

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हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं

भाजपा नेता ने यह भी जानकारी दी कि इस भर्ती के खिलाफ दूसरे अभ्यर्थी साकेत अग्रवाल ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती दी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने साकेत अग्रवाल के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए उन्हें नियुक्ति देने का आदेश जारी किया। अदालत के आदेश के बावजूद विभाग द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने पर भी श्रीवास ने सवाल उठाए हैं।

गौरी शंकर श्रीवास का कहना है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद भी यदि विभाग मौन बना रहता है, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला आयोग की कार्यप्रणाली पर भी संदेह उत्पन्न करता है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

आयोग में पदस्थ 3 सदस्यों को हटाने की मांग

इसी संदर्भ में श्रीवास ने राज्यपाल और लोक सेवा आयोग को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो उस समय आयोग में पदस्थ तीनों सदस्यों को उनके पद से हटाया जाना चाहिए। बता दें कि ये तीनों सदस्य कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान नियुक्त किए गए थे। श्रीवास का कहना है कि लोक सेवा आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह संस्था राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अधिकारियों का चयन करती है।

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