टीआरपी डेस्क। मिडिल ईस्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी और खौफनाक खबर सामने आ रही है, जहां अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर सीधा हमला बोल दिया है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध की लपटें तेज हो गई हैं। ईरान ने भी चुप बैठने के बजाय पलटवार करते हुए बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस टकराव ने दुनिया को एक बड़े वैश्विक संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के बाद से ही क्षेत्र में तनाव चरम पर था। अब इस तनाव ने एक भीषण युद्ध का रूप ले लिया है। अमेरिका और इजरायल की वायुसेनाओं ने संयुक्त अभियान चलाकर ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है। इस हमले के जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मंगलवार सुबह बहरीन के शेख ईसा इलाके में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर बड़ा ड्रोन और मिसाइल हमला किया। IRGC का दावा है कि इस हमले में अमेरिकी बेस को भारी नुकसान पहुंचा है।
युद्ध की यह आग अब लेबनान तक फैल चुकी है। ईरान समर्थित उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह भी खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए इस जंग में कूद पड़ा है। हिजबुल्लाह ने इजरायल के भीतर कई सिलसिलेवार धमाके किए हैं, जिससे वहां जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इसके जवाब में इजरायल ने हिजबुल्लाह के सबसे मजबूत गढ़, बेरूत के दहियाह इलाके पर भीषण बमबारी की है। इस हमले में हजारों लोग बेघर हो गए हैं और चारों तरफ तबाही का मंजर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई के बाद ईरान में सत्ता का वैक्यूम और अमेरिका-इजरायल की आक्रामक नीति ने इस क्षेत्र को बारूद के ढेर पर बिठा दिया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी जमीन पर हुए किसी भी हमले का जवाब दोगुने वेग से देगा, जबकि अमेरिका ने इसे अपनी सुरक्षा और सहयोगियों के बचाव के लिए जरूरी कदम बताया है।
मंगलवार सुबह ईरान ने बहरीन स्थित शेख ईसा अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया। इस हमले में भारी तादाद में ड्रोन्स और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। बेरूत (लेबनान) के दहियाह इलाके में इजरायली हमले के बाद शरणार्थियों का संकट खड़ा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस तनाव के कारण कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में तत्काल प्रभाव से 5% से 8% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।


