बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रिटायर्ड कॉलेज प्रिंसिपल के मामले में पेंशन कमेटी के आदेश को रद्द कर समस्त सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि शासकीय सेवक को विभागीय जांच में दण्डित किए बगैर सेवानिवृत्ति लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है।

क्या है मामला..?

याचिकाकर्ता मीरा वर्मा के पति जी एस वर्मा जवाहरलाल नेहरु महाविद्यालय सक्ती से प्रिंसिपल के पद से 30 नवंबर 2009 को सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति उपरांत सेवा लाभ न मिलने पर उनके द्वारा उच्च स्तरीय पेंशन कमेटी के समक्ष याचिका दायर की गई। उच्च स्तरीय पेंशन समिति ने सेवानिवृत्ति लाभ हेतु जी एस वर्मा का आवेदन खारिज कर दिया। समिति ने यह आधार लिया कि, आवेदक के विरुद्ध ऑडिट आपत्ति दर्ज होने से सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिया जा सकता । वर्मा के स्वर्गवास के पश्चात उनकी ओर से मीरा वर्मा द्वारा उच्च न्यायालय में अधिवक्ता सुशोभित सिंह के माध्यम से याचिका दायर की गई। याचिका में बताया गया कि केवल आडिट आपत्ति के आधार पर सेवानिवृत्ति लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता, जी एस वर्मा के विरुद्ध विभागीय जाँच संस्थित नहीं की गई, विधिवत आरोप पत्र नहीं दिया गया और न ही उनके विरुद्ध दण्डादेश जारी किया गया। याचिका में नोटिस जारी किया गया तथा शासन के जवाब प्रस्तुत करने पर प्रकरण की अंतिम सुनवाई की गई। उच्च न्यायालय ने समग्र विचारोपरांत यह आदेश दिया कि, किसी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति लाभ से तब तक वंचित नहीं किया जा सकता जब तक उसे विधिवत संस्थित विभागीय जांच में दोषसिद्ध नहीं किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने पेंशन कमेटी के आदेश को रद्द कर समस्त सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने का आदेश पारित किया है।

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