रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज बस्तर संभाग के किसानों और धान खरीदी की व्यवस्था को लेकर मुद्दा उठाया गया। प्रश्नकाल के दौरान बस्तर में धान खरीदी की प्रक्रिया और इसमें हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

बता दें कि विधायक लखेश्वर बघेल ने सदन में बस्तर के किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि दावों के विपरीत धरातल पर किसान परेशान हैं।

44 हजार किसानों का धान बकाया
विधायक लखेश्वर बघेल के सवाल का जवाब देते हुए खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सदन को बताया कि बस्तर संभाग में धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होकर 31 जनवरी को संपन्न हुई थी। मंत्री ने स्वीकार किया कि संभाग के करीब 44,612 किसानों का धान नहीं खरीदा जा सका।

हालांकि, सरकार की ओर से सफाई देते हुए मंत्री ने कहा कि इन किसानों ने खरीदी केंद्रों पर अपना धान लाया ही नहीं, जिसके चलते उनकी खरीदी संभव नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि करीब 9,906 किसानों ने इस बार धान नहीं बेचा है।

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विपक्ष ने सरकार के ’21 क्विंटल प्रति एकड़’ धान खरीदी के वादे पर भी तंज कसा। लखेश्वर बघेल ने कहा कि एक तरफ सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ धान में पानी डालने जैसी शिकायतें और अन्य सामानों की अवैध खरीदी के मामले सामने आ रहे हैं।

बता दें कि विपक्ष ने बस्तर के ऋणी किसानों और वनाधिकार पट्टाधारियों की वास्तविक संख्या की भी मांग की है, ताकि यह पता चल सके कि कितने असली किसानों को योजना का लाभ मिल रहा है।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने भी साधा निशाना
बहस के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने सरकार से सीधे सवाल किया कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर किसानों से धान का समर्पण क्यों कराया गया और वे अपनी फसल बेचने से क्यों चूक गए।

वहीं, खाद्य मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि यह स्थिति नई नहीं है, पिछली सरकार के वक्त भी सभी पंजीकृत किसान धान बेचने नहीं आते थे। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बताया।

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