भोपाल। मध्य प्रदेश के कानूनी गलियारे से सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश के 93 हजार से अधिक अधिवक्ताओं की ‘संसद’ यानी स्टेट बार काउंसिल के चुनाव का बिगुल बज गया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद उच्चाधिकार प्राप्त चुनाव समिति ने पूरा चुनावी शेड्यूल जारी कर दिया है। इस बार चुनाव की कमान रिटायर्ड जस्टिस एस.के. पालो को सौंपी गई है, जिन्हें रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है।

26 सीटों के लिए मचेगा घमासान, 12 मई को फैसला

मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल के 26 सदस्यों को चुनने के लिए आगामी 12 मई को मतदान होगा। इस चुनाव में प्रदेशभर के लगभग 93,000 वकील अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। गौरतलब है कि, मतगणना के लिए एक महीने से ज्यादा का इंतजार करना होगा, क्योंकि वोटों की गिनती 16 जून 2026 से शुरू की जाएगी। चुनाव समिति ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई जाएगी।

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16 मार्च को आएगी पहली लिस्ट, दावे-आपत्ति का मौका

दरअसल, चुनाव की पहली सीढ़ी यानी प्रोविजनल मतदाता सूची 16 मार्च को सार्वजनिक कर दी जाएगी। अगर किसी वकील का नाम छूट गया है या कोई जानकारी गलत है, तो वे 24 मार्च तक अपनी दावे-आपत्ति पेश कर सकेंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मतदाताओं की अंतिम सूची का प्रकाशन 1 अप्रैल को होगा, जिसके बाद असली चुनावी दंगल शुरू होगा।

नामांकन से लेकर नाम वापसी तक का पूरा शेड्यूल

हैरानी की बात यह है कि इस बार नामांकन के लिए सिर्फ तीन दिन का समय दिया गया है। चुनाव कार्यक्रम कुछ इस प्रकार है।

8 से 10 अप्रैल: नामांकन फॉर्म जमा करने की तारीख।

15-16 अप्रैल: भरे गए फॉर्मों की बारीकी से जांच।

20 से 22 अप्रैल: नाम वापसी की प्रक्रिया (प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे)।

22 अप्रैल (शाम 5 बजे): मैदान में डटे उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट जारी होगी।

जस्टिस एस.के. पालो की निगरानी में ‘क्लीन इलेक्शन’

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल चुनावों में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया था, जिसके बाद यह चुनाव कार्यक्रम घोषित हुआ है। रिटायर्ड जस्टिस एस.के. पालो की नियुक्ति यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो। रायपुर और बिलासपुर के विधि विशेषज्ञों का भी मानना है कि एमपी स्टेट बार के चुनाव का असर पड़ोसी राज्यों की बार राजनीति पर भी पड़ता है।

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