प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और संचालक हिना अनिमेष नेताम आदि परब की जानकारी देते


टीआरपी। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए 13 और 14 मार्च 2026 को नवा रायपुर में ’आदि परब – 2026’ का भव्य आयोजन होने जा रहा है। नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में होने वाले इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सहित 6 राज्यों के जनजातीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

पहली बार एक मंच पर आदि-परिधान का जलवा

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और संचालक हिना अनिमेष नेताम ने बताया कि इस बार सबसे खास “आदि-परिधान जनजातीय अटायर शो” होगा। इसमें पहली बार राज्य की सभी 43 जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा को एक ही मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। प्राकृतिक रंगों और हाथों से तैयार इन वस्त्रों के प्रदर्शन के लिए 120 प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है।

आदि-रंग और आदि-हाट का आकर्षण

महोत्सव में “आदि रंग” के तहत जनजातीय चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित होगी, जिसमें 155 कलाकार जल-जंगल-जमीन के संदेश को कैनवास पर उतारेंगे। विजेताओं को 20 हजार रुपये तक के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। वहीं, “आदि-हाट” में 14 विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे, जहाँ लोग छत्तीसगढ़ के पारंपरिक स्वाद और दुर्लभ हस्तशिल्प का लुत्फ उठा सकेंगे।

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यूपीएससी के सितारों का होगा सम्मान

आदि परब के मंच से प्रदेश के उन युवाओं को भी सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन किया है। विभाग की योजनाओं से सफल हुए डायमंड सिंह ध्रुव और अंकित साकनी का विशेष सम्मान होगा। साथ ही प्रयास संस्थान के होनहार विद्यार्थियों को लैपटॉप भी वितरित किए जाएंगे।

इस आयोजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। दो दिवसीय इस उत्सव में बड़ी संख्या में पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों के जुटने की उम्मीद है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की 43 जनजातियों की लुप्त होती परंपराओं और उनके पारंपरिक ज्ञान को सहेजने का एक बड़ा माध्यम बनेगा। स्थानीय कलाकारों के लिए यह एक नेशनल प्लेटफॉर्म है, जहाँ आदि-हाट के जरिए उनके हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को बाजार मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।