टीआरपी डेस्क। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य’ में बढ़ते अस्थिरता के बीच देश में ऊर्जा सुरक्षा पर बहस छिड़ गई है। दावा किया जा रहा है कि, भारत के पास केवल 25 दिनों का तेल रिजर्व है, लेकिन सरकारी रिपोर्ट और हालिया डेटा कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे हैं। यदि वैश्विक तनाव के कारण होर्मुज मार्ग बंद होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति तत्काल ठप हो जाएगी। लेकिन, सरकार के आंकड़े दूसरी ओर इशारा कर रहा हैं। होमुर्ज मार्ग बंद होने के दावे के बीच भारत सरकार का कहना है कि, देश की ऊर्जा रणनीति अब ‘एक-मार्ग’ या ‘एक-स्रोत’ पर निर्भर नहीं है। भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग मौजूद हैं।


सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में क्रूड ऑयल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का कुल स्टॉक 250 मिलियन बैरलसे अधिक है। यह लगभग 4000 करोड़ लीटर के बराबर है। यह स्टॉक पूरी सप्लाई चेन के लिए 7 से 8 हफ्ते (लगभग 2 महीने) तक चलने के लिए पर्याप्त है। विशाखापत्तनम, मंगलौर और पादुर की ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हमारी सबसे बड़ी ढाल है। इसके अतिरिक्त, तेल कंपनियों (OMCs) के पास 64.5 से 70 दिनों की खपत के बराबर कमर्शियल स्टॉक हमेशा बना रहता है।

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आज से 10 साल पहले भारत केवल 27 देशों से तेल खरीदता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 40 हो गई है।भारत का केवल 40% क्रूड ऑयल होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है। शेष 60% तेल भारत रूस, वेस्ट अफ्रीका, अमेरिका और सेंट्रल एशिया से आयात करता है।


फरवरी 2026 तक रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर बना हुआ है। जियो-पॉलिटिकल तनाव के बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हित में रूसी तेल खरीदना जारी रखा है। भारत G7 के प्राइस कैप नियमों का सम्मान करता है। हाल ही में अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा दिया गया 30 दिन का वेवर वैश्विक बाजार को स्थिर रखने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है।

भारत की असली ताकत उसकी बढ़ती रिफाइनिंग क्षमता और इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम है। 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग से हर साल करीब 44 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल की बचत हो रही है। भारत की रिफाइनिंग क्षमता 258 MMTPA हो गई है, जबकि हमारी घरेलू खपत 210-230 MMTPA है। इसी सरप्लस क्षमता की वजह से रूसी क्रूड को रिफाइन कर भारत ने यूरोप में ईंधन की कमी को पूरा किया है।

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पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़े बताते हैं कि जहां पूरी दुनिया महंगाई से जूझ रही है, भारत में कीमतें स्थिर हैं। फरवरी 2022 से फरवरी 2026 तक भारत में 0.67% की कमी आई है। इसके उल्ट पाकिस्तान में 55% और जर्मनी में 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।


डेटा यह स्पष्ट करता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रणाली ‘अल्पकालिक बाधाओं’ से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। ईंधन की किल्लत की बात केवल एक काल्पनिक भय है। भारत का बहुआयामी सुरक्षा ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि आम जनता की दैनिक आवश्यकताओं (पेट्रोल, डीजल, एटीएफ) पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।