रायपुर। छत्तीसगढ़ में गौवंश के संवर्धन के लिए संचालित केन्द्र पोषित चिराग परियोजना के बंद होने का मामला विधानसभा में गूंजा। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई और सदन में कुछ देर तक शोर-शराबे की स्थिति बनी रही।

भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने उठाया मुद्दा।

दरअसल प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर ने राज्य में पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान की नीति और चिराग परियोजना को बंद किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह पीएम मोदी की इच्छानुसार योजना है। प्रदेश में उपलब्ध‌ गौवंशी  पशुओं में 53 लाख मादाओं से पशु प्रजनन की क्या योजना है? इसके लिए कौन सा टीकाकरण अभियान किस माध्यम से चला रहे।

प्रदेश में 400 से अधिक कृत्रिम गर्भाधान केंद्र की जरूरत 

 इसके जवाब में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि राज्य में पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान के लिए कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है और  पर्याप्त गर्भाधान केंद्र हैं। वर्तमान में 1585 संस्थाओं के माध्यम से यह कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गौवंशीय पशुओं की संख्या के आधार पर लगभग 412 कृत्रिम गर्भाधान केन्द्रों की आवश्यकता है।

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चिराग योजना बंद होने पर उठाया सवाल

पूर्व मंत्री चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान की स्थिति दयनीय है और पशुधन प्रजनन नीति किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने चिराग परियोजना बंद किए जाने के कारणों पर सवाल उठाया। मंत्री नेताम ने बताया कि चिराग परियोजना 12 फरवरी को लागू की गई थी और इसकी स्वीकृत अवधि 5 वर्ष 5 माह थी।  पूर्ववर्ती सरकार में अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण केन्द्र सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले का परीक्षण कराया जाएगा और जिम्मेदारी तय की जाएगी।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने गांवों में बछिया के कृत्रिम गर्भाधान और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की सरकार की योजना के बारे में जानकारी मांगी। इस पर मंत्री ने बताया कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए एनडीडीबी के के साथ समझौता किया गया है और चिलिंग प्लांट स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

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पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने मंत्री को इस तरह घेरा

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल उठाते हुए पूछा कि चिराग परियोजना की राशि कब समर्पित की गई। मंत्री नेताम ने कहा कि 26 मार्च 2025 को केन्द्र के पत्र के आधार पर योजना की राशि समर्पित की गई थी।

इस पर बघेल ने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में योजना बंद हुई है, लेकिन जिम्मेदारी पिछली सरकार पर डाली जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने इस दिशा में क्या कदम उठाए। तब कृषि मंत्री नेताम ने कहा कि परियोजना बंद होने के पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।