सनातन परंपरा में आज का दिन बेहद पावन है। चैत्र कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि, यानी ‘दशा माता’ का व्रत। दरअसल, आर्थिक तंगी को दूर करने और परिवार की सुख-शांति के लिए सुहागिन महिलाएं आज पूरे विधि-विधान से दशा माता की पूजा कर रही हैं। राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर के सुदूर गांवों तक आज महिलाएं पीपल के पेड़ की पूजा करती नजर आएंगी।

आज है पूजा का सबसे सही समय

बता दें कि पंचांग के अनुसार यह तिथि 13 मार्च 2026 को सुबह 06:28 बजे से शुरू होकर पूरी रात रहेगी, इसलिए आज ही व्रत करना सबसे उत्तम है। पंडितों के अनुसार पूजा के लिए दो बेहद खास मुहूर्त हैं:

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:07 से 12:55 तक।

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:18 तक।

पूजा विधि: कैसे बनाएं 10 गांठ वाला डोरा?

दशा माता की पूजा में कच्चे सूत का बहुत महत्व है। अगर आप आज पूजा कर रही हैं, तो इन स्टेप्स का पालन करें।

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संकल्प: सुबह जल्दी स्नान कर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

डोरा तैयार करें: कच्चे सूत से 10 तार वाला डोरा बनाएं और उसे हल्दी में रंग लें। इसमें 10 गांठ जरूर लगाएं।

पीपल की पूजा: पीपल के पेड़ के तने पर 10 बार कच्चा सूत लपेटें और परिक्रमा करें।

डोरा धारण करें: पूजा के बाद उस 10 गांठ वाले डोरे को गले में धारण करें। यह माता का आशीर्वाद माना जाता है।

क्यों खास है दशा माता का व्रत?

गौरतलब है कि पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के बाद अपने घर के मुख्य द्वार पर हल्दी और रोली से छापे लगाना न भूलें। मैदानी सूत्रों का कहना है कि यह व्रत महिलाओं के लिए ‘दशा सुधारने’ वाला माना जाता है—यानी जो भी आर्थिक संकट या पारिवारिक कलह है, वह माता की कृपा से दूर हो जाती है।

धार्मिक महत्व

दशा माता की कथा सुनना आज के दिन अनिवार्य है। महिलाएं आज अपनी श्रद्धा के अनुसार डोरे को अगले साल तक या व्रत के अगले दिन विसर्जित करती हैं। यह व्रत न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे लोक जीवन में नारी शक्ति के धैर्य और विश्वास को भी दर्शाता है।

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