रायपुर। प्रधानमंत्री सड़क योजना के चीफ इंजीनियर के.के. कटारे के जाति प्रमाण-पत्र मामले में एक नया मोड़ आ गया है। उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा प्रमाण-पत्र निरस्त करने और बर्खास्तगी की लटकी तलवार के बीच, कुटारे को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से फौरी राहत मिली है। मिली जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने छानबीन समिति के आदेश पर फिलहाल स्टे (स्थगन) लगा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने कटारे के जाति प्रमाण-पत्र को फर्जी करार देते हुए उसे निरस्त कर दिया था। समिति का कहना था कि कुटारे का मूल निवास तुमसर (महाराष्ट्र) है, जबकि उन्होंने मध्य प्रदेश के बालाघाट से अनुसूचित जाति का लाभ उठाया है।
बता दें कि जनपद पंचायत डोंगरगांव के उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौकर और विजय मिश्रा ने 2017 से लगातार शिकायत की थी। सुप्रीम कोर्ट के एक्शन कमेटी केस का हवाला देते हुए समिति ने माना कि एक राज्य की जाति का लाभ दूसरे राज्य में नहीं लिया जा सकता। जांच के दौरान 1935 के नगर पालिका रिकॉर्ड में कुटारे के दादा की जाति खटीक दर्ज मिली थी।
हाई कोर्ट ने दिया स्टे
सूत्रों के अनुसार, छानबीन समिति के आदेश के बाद के.के. कटारे ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनते हुए फिलहाल समिति के आदेश पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद कुटारे के पद पर बने रहने का रास्ता साफ हो गया है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी लंबित है।
इस पूरे प्रकरण में जिस तरह से प्रधानमंत्री सड़क योजना और प्रधानमंत्री विकास अभिकरण के चीफ इंजीनियर का नाम उछला है, उसने विभागीय गलियारों में खलबली मचा दी है। वहीं इस स्टे के साथ कुटारे की बर्खास्तगी का खतरा फिलहाल टल गया है।



