रायपुर। कलिंगा विश्वविद्यालय द्वारा 13 मार्च 2026 को जिला न्यायालय, चंद्रपुर, महाराष्ट्र में Artificial Intelligence विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न्यायालय परिसर में स्थानीय बार एसोसिएशन के सहयोग और समर्थन से आयोजित किया गया, जिसने इस सत्र के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


इस कार्यक्रम में जिला बार एसोसिएशन के कई पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें अधिवक्ता विक्रम टंडन (अध्यक्ष, बार एसोसिएशन), अधिवक्ता अमन मयेकर (उपाध्यक्ष), अधिवक्ता अभिजीत किंहिकार (सचिव) तथा अधिवक्ता मुनीधर बावंकर (कोषाध्यक्ष) शामिल थे। उनकी उपस्थिति और सहयोग से संगोष्ठी का सफलतापूर्वक आयोजन संभव हो सका।

इस संगोष्ठी में प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं तथा विधि क्षेत्र से जुड़े सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विधि व्यवसाय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका को समझने में गहरी रुचि दिखाई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह बताना था कि तकनीकी प्रगति किस प्रकार विधिक अनुसंधान, केस प्रबंधन, साक्ष्य विश्लेषण तथा न्यायिक प्रक्रियाओं को प्रभावित और परिवर्तित कर रही है।

See also  आम आदमी पार्टी चला रही छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों का पोल खोल अभियान, नेताओं ने दी चुनौती- केजरीवाल सरकार की तरह शिक्षा का मॉडल बनाकर दिखाएं भूपेश सरकार

विशेषज्ञ सत्र डॉ. पलक शर्मा, सहायक प्राध्यापक, विधि संकाय, कलिंगा विश्वविद्यालय तथा सुश्री विशाखा साखरकर, सहायक प्राध्यापक, विधि संकाय, कलिंगा विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने विधि और प्रौद्योगिकी के बीच विकसित हो रहे संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। सत्र के दौरान विधिक अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, वाद-विवाद में प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, विधिक ड्राफ्टिंग में ऑटोमेशन तथा न्याय वितरण प्रणाली में एआई के उपयोग से जुड़े नैतिक और नियामक चुनौतियों पर चर्चा की गई।

चर्चा के दौरान विधि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के बढ़ते महत्व और आधुनिक न्यायिक प्रक्रियाओं में इसकी भूमिका को समझने की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया गया। सत्र में बताया गया कि एआई आधारित उपकरणों का उपयोग अब कानूनी अनुसंधान, दस्तावेज़ विश्लेषण, केस प्रबंधन और साक्ष्यों के मूल्यांकन में तेजी से किया जा रहा है। अधिवक्ताओं को प्रोत्साहित किया गया कि वे उभरती हुई एआई तकनीकों से परिचित हों, जो कार्यक्षमता बढ़ाने, सटीकता में सुधार करने और समकालीन विधिक अभ्यास में बेहतर निर्णय-निर्माण में सहायक हो सकती हैं।

See also  वन विभाग पर हमले के खिलाफ कार्रवाई करने गई पुलिस पर आदिवासियों ने फिर किया पथराव

सत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उसका दुरुपयोग: कानूनी चुनौतियाँ तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (भारत) की भूमिका विषय पर भी चर्चा की गई। इसमें एआई तकनीकों के दुरुपयोग से उत्पन्न कानूनी चिंताओं जैसे डीपफेक, पहचान की चोरी और डिजिटल हेरफेर पर प्रकाश डाला गया। चर्चा में यह भी रेखांकित किया गया कि इन उभरती तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए कानूनी जागरूकता बढ़ाना, एआई का जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना तथा मौजूदा साइबर कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।

कलिंगा विश्वविद्यालय लगातार ऐसे प्रयास करता रहा है, जिनके माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों और न्यायपालिका के बीच सार्थक संवाद स्थापित हो सके। ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य बार और बेंच के सदस्यों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और उभरते हुए विधिक मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें कलिंगा विश्वविद्यालय की व्यावसायिक विकास और विधिक ज्ञान के संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया गया।

See also  राजस्थान : अब कोचिंग संस्थान सार्वजनिक नहीं करेंगे असेसमेंट टेस्ट का रिजल्ट : आत्महत्या की घटनाओं को रोकने की कवायद