filter: 0; fileterIntensity: 0.0; filterMask: 0; captureOrientation: 0;?algolist: 0;?multi-frame: 1;?brp_mask:8;?brp_del_th:0.0173,0.0000;?brp_del_sen:0.1300,0.0000;?motionR: 0;?delta:1;?bokeh:1;?module: photo;hw-remosaic: false;touch: (-1.0, -1.0);sceneMode: 7864320;cct_value: 0;AI_Scene: (-1, -1);aec_lux: 192.36546;aec_lux_index: 0;albedo: ;confidence: ;motionLevel: -1;weatherinfo: null;temperature: 41;

कोटा, बिलासपुर। सेंट जेवियर्स स्कूल की रानीसागर, कोटा ब्रांच को भरनी में शिफ्ट करने के फैसले ने आरटीई के तहत पढ़ने वाले करीब 80 बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है। 1 अप्रैल 2026 से रानीसागर शाखा बंद कर सभी गतिविधियां भरनी में संचालित करने की घोषणा के बाद अभिभावकों में जबरदस्त आक्रोश है। इस मुद्दे पर अभिभावकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर घेराव किया और अपनी नाराजगी जाहिर की।

दूरी अधिक, कैसे जाएंगे स्कूल..?

अभिभावकों का कहना है कि जिन बच्चों को शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत इस स्कूल में दाखिला मिला, अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे आगे पढ़ेंगे कहां। भरनी ब्रांच की दूरी अधिक होने से छोटे बच्चों के लिए रोज आना-जाना मुश्किल होगा, वहीं परिवहन खर्च भी बड़ा बोझ बनेगा। इसके बावजूद अभिभावक किसी तरह बच्चों को भरनी भेजने को तैयार थे, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने वहां RTE छात्रों के प्रवेश से ही हाथ खड़े कर दिए।

See also  शासकीयकरण की मांग को लेकर प्रदेश भर के पंचायत सचिव आज से कलमबंद हड़ताल पर, पंचायतों में कामकाज ठप्प

जाएं तो जाएं कहां?

कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान अभिभावकों ने साफ कहा कि यह फैसला बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए शाखा बंद करने का निर्णय लिया और RTE छात्रों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान “बच्चों का भविष्य बचाओ” और “RTE छात्रों के साथ अन्याय बंद करो” जैसे नारे गूंजते रहे। कई अभिभावकों ने कहा कि अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आगे उच्च स्तर पर शिकायत करेंगे।

स्कूल प्रबंधन का पत्र, लेकिन RTE पर एक शब्द नहीं

स्कूल प्रबंधन ने 16 फरवरी 2026 को जारी पत्र में “अपरिहार्य परिस्थितियों” और “सहयोग नहीं मिलने” का हवाला देते हुए रानी सागर ब्रांच बंद करने की जानकारी दी थी। साथ ही यह भी बताया गया कि राज्य शिक्षा विभाग से परामर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है।
हालांकि इस पत्र में RTE के तहत पढ़ रहे छात्रों के भविष्य को लेकर कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिसे लेकर अभिभावकों में नाराजगी और बढ़ गई है।

See also  रायपुर पहुंचीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, मतहारी हुंकार रैली में शामिल होने बिलासपुर रवाना

अफसरों का जवाब भी सवालों के घेरे में

जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे का कहना है कि कोटा और भरनी ब्रांच का कोड अलग है, इसलिए RTE के बच्चों को सीधे वहां एडमिशन नहीं मिल सकता। उन्होंने यह विकल्प जरूर बताया कि अभिभावक चाहें तो बच्चों का दाखिला शासकीय स्कूल में करा सकते हैं।
इस बयान के बाद अभिभावकों का गुस्सा और बढ़ गया। उनका कहना है कि यदि शासकीय स्कूल में ही पढ़ाना होता तो वे निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में RTE के तहत प्रवेश क्यों दिलाते।

प्रबंधन गायब, जिम्मेदारी से बचने का आरोप

पूरे मामले में स्कूल प्रबंधन का कोई जिम्मेदार व्यक्ति सामने नहीं आया। अभिभावकों का आरोप है कि प्रबंधन अपनी मजबूरी बताकर पल्ला झाड़ रहा है और सारी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग पर डाल रहा है।

दूसरी ओर, अभिभावकों का कहना है कि अधिकारी केवल पत्राचार तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर बच्चों की समस्या का समाधान नहीं हो रहा।

See also  BJP और VHP लगी हैं धर्म को नष्ट करने मेंः दिग्विजय सिंह

अभिभावकों ने कलेक्ट्रेट का किया घेराव

कोटा में उठा यह मामला अब शिक्षा व्यवस्था और RTE के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, जहां एक ओर नियमों की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर बच्चों का भविष्य अनिश्चितता में झूलता नजर आ रहा है।