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High Court grants major relief to women excluded from police recruitment

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने राजधानी रायपुर के अभनपुर इलाके में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना को लेकर पुलिस की मामूली कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। यहां जादू-टोना के शक में एक ही परिवार के तीन लोगों तिलक साहू, उनके पिता अमर सिंह और भाई नरेशपर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। भीड़ ने न सिर्फ उन्हें जमकर पीटा, बल्कि उन्हें आधा नंगा कर पूरे गांव में घुमाया। उनके चेहरे पर कालिख पोती गई और जूतों की माला पहनाकर रात भर बंधक बनाकर रखा गया।

इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे। आरोप है कि मौके पर पहुंचने के बाद भी पुलिस ने पीड़ितों की मदद करने की बजाय उनसे जबरन एक कागज पर दस्तखत करा लिए कि वे कोई शिकायत नहीं करेंगे। बाद में, कोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस ने आरोपियों पर मामूली धाराएं लगाकर खानापूर्ति कर दी।

कोर्ट ने मॉब लिंचिंग जैसा मामला बताया

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने इस लापरवाही को ‘मॉब लिंचिंग’ जैसा गंभीर मामला माना है। कोर्ट ने पुलिस की इस हरकत पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि न्यायिक आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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अदालत ने अब सीधे पुलिस महानिदेशक को आदेश दिया है कि वे दोषी पुलिस अफसरों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच की रिपोर्ट शपथ पत्र के साथ पेश करें। इधर, पुलिस अफसरों ने तत्कालीन थाना प्रभारी सिद्धेश्वर प्रताप सिंह और सब-इंस्पेक्टर नरसिंह साहू के खिलाफ चार्जशीट जारी कर दी है।

हाई कोर्ट ने कहा है कि पीड़ित अपनी सारी शिकायतें और सबूत ट्रायल कोर्ट के सामने रख सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल को होगी।