टीआरपी। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र में सोलर प्लांट के लिए गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड (GPIL) को किए गए भूमि आवंटन का मुद्दा गरमाया रहा। कांग्रेस विधायक चातुरी नंद ने इस प्रक्रिया को नियमों के खिलाफ बताते हुए सरकार को घेरा, जिसके बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

103 हेक्टेयर (करीब 253 एकड़) सरकारी जमीन का एक निजी कंपनी को 99 साल की लीज पर दिया जाना स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ा बदलाव है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में तालाबों को पाटा गया और पेड़ों की कटाई की गई, जिससे सरायपाली क्षेत्र के जल स्तर और पर्यावरण पर दीर्घकालिक बुरा असर पड़ सकता है।

103 हेक्टेयर जमीन और 99 साल की लीज


विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, सरायपाली में सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए 103.11 हेक्टेयर शासकीय भूमि का आवंटन किया गया है। उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि यह जमीन 4.82 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से 99 वर्षों के लिए लीज पर दी गई है। इसके अलावा, कंपनी को हर साल लगभग 28 लाख रुपये का वार्षिक लीज रेंट भी शासन को देना होगा।

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तालाबों को पाटने और पेड़ों की कटाई के गंभीर आरोप


विधायक चातुरी नंद ने आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी भूमि का आवंटन औद्योगिक आवश्यकता से अधिक है। उन्होंने सदन में दावा किया कि प्लांट निर्माण के दौरान पर्यावरणीय नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए तालाबों को पाटा गया है। उन्होंने मांग की कि यदि जमीन का उपयोग नियमों के विरुद्ध किया गया है, तो यह लीज स्वतः निरस्त होनी चाहिए।

बीजेपी विधायक द्वारकाधीश यादव ने भी कम दर पर जमीन आवंटन को लेकर सवाल उठाए, जिस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि दरें तय औद्योगिक नीति के अनुसार ही निर्धारित की गई हैं।

सरकार का पक्ष: “प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक”


उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने तारीखवार विवरण देते हुए आवंटन को पारदर्शी बताया:

25 फरवरी 2025: 102 हेक्टेयर भूमि उद्योग विभाग को हस्तांतरित हुई।

06 मार्च 2025: भूमि सीएसआईडीसी (CSIDC) को सौंपी गई।

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22 मई 2025: सीएसआईडीसी द्वारा विधिवत कंपनी को आवंटित की गई।

मंत्री ने कहा कि कलेक्टर महासमुंद द्वारा एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो शिकायतों की जांच कर रही है।


कुल आवंटित भूमि: 103.11 हेक्टेयर (सरायपाली क्षेत्र)।

आवंटन दर: 4.82 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर।

लीज अवधि: 99 वर्ष।

वार्षिक किराया: लगभग 28 लाख रुपये।

महासमुंद कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि क्या मौके पर पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन हुआ है। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि जांच निष्पक्ष नहीं हुई, तो वे इस मामले को सड़क से लेकर सदन तक और उग्र रूप से उठाएंगे।