Digvijaya Singh: नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने अपना कार्यकाल खत्म होने पर सदन में भावुक विदाई भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने सभी दलों के नेताओं का आभार जताया और अपने लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने यह भी साफ किया कि वे तीसरी बार राज्यसभा नहीं जाएंगे।

Digvijaya Singh: अपने भाषण में दिग्विजय सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तियां पढ़ीं और कहा, “मैं न टायर्ड हूं, न रिटायर्ड हूं,” यानी वे आगे भी राजनीति में सक्रिय रहेंगे। उनके इस बयान को मध्य प्रदेश की राजनीति में उनकी वापसी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

Digvijaya Singh: उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि छात्र जीवन में उनका राजनीति से कोई संबंध नहीं था। 22 साल की उम्र में मैं निर्विरोध नगर पालिका अध्यक्ष बना, 30 की उम्र में विधायक और 33 में मंत्री बना। 40 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला।

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Digvijaya Singh: दिग्विजय सिंह ने यह भी बताया कि उनका कांग्रेस में प्रवेश पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कराया था। उन्होंने राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ अपने संसदीय अनुभवों को भी साझा किया। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी के प्रति कटुता नहीं रखी। अगर मेरे किसी शब्द से किसी को ठेस पहुंची हो तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं।

Digvijaya Singh: पुराने नेताओं से मिली सीख

दिग्विजय सिंह ने अपने संसदीय अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और चंद्रशेखर जैसे नेताओं के साथ काम करने का मौका मिला, जिससे उन्हें काफी सीख मिली। उन्होंने सदन की कार्यप्रणाली पर भी बात करते हुए कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत चर्चा और संवाद में है।

दिग्विजय सिंह ने कहा, सरकार और विपक्ष को मिलकर रास्ता निकालना चाहिए, लेकिन आज इस परंपरा में कमी दिख रही है। उन्होंने देश में बढ़ती साम्प्रदायिक तनाव और मनमुटाव पर चिंता जताई और कहा कि यह देश की संस्कृति, लोकतंत्र और संविधान के लिए सही नहीं है।

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Digvijaya Singh: सदन की गरिमा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि संसद में संवाद जरूरी है और कटुता से बचना चाहिए। लोकतंत्र में स्वस्थ चर्चा ही सबसे अहम होती है। बता दें कि, दिग्विजय सिंह के राज्यसभा से हटने और तीसरी बार जाने से इनकार के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि वे अब मध्य प्रदेश की राजनीति में फिर से सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।