कोटमी सोनार मगरमच्छ संरक्षण रिजर्व जांजगीर-चांपा

टीआरपी। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा वनमण्डल के अंतर्गत आने वाला कोटमीसोनार आज वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास की एक मिसाल बन चुका है। कभी गुमनाम रहा यह गांव अब 250 मगरमच्छों के सुरक्षित बसेरे और एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान बना चुका है।

मगरमच्छों के संरक्षण ने कोटमीसोनार को एक छोटे बाजार के रूप में तब्दील कर दिया है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय ग्रामीणों को गाइड, कैफेटेरिया, और छोटे व्यवसायों के माध्यम से सीधा रोजगार मिल रहा है, जिससे क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।

मुड़ातालाब: 57 हेक्टेयर में फैला रोमांच का केंद्र


वन विभाग ने मुड़ातालाब को चिन्हित कर जिले के विभिन्न तालाबों से मगरमच्छों को लाकर यहाँ एक सुरक्षित प्राकृतिक आवास प्रदान किया है। 57.037 हेक्टेयर में फैले इस केंद्र को दो हिस्सों में बांटा गया है:

कोर जोन: 34 हेक्टेयर (मगरमच्छों का मुख्य आवास)

बफर जोन: 23.037 हेक्टेयर (पर्यटकों और अन्य सुविधाओं के लिए)

See also  CG NEWS : स्थापना दिवस में शामिल होने 1848 KM दुरी तय कर CRPF की महिला बाइकर्स पहुंची छत्‍तीसगढ़

इस परियोजना की नींव 9 मई 2006 को रखी गई थी और 23 अगस्त 2008 को इसका विधिवत लोकार्पण किया गया। वर्तमान में यहाँ पर्यटकों के लिए वॉच टावर, 3-डी मिनी थिएटर, चिल्ड्रन पार्क और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन का संगम


भारत सरकार के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत मगरमच्छों की लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने के लिए यह केंद्र मील का पत्थर साबित हो रहा है। 1 नवम्बर 2015 से यहाँ विधिवत पर्यटन शुल्क लागू किया गया, जिसके बाद से राजस्व और स्थानीय विकास में तेजी आई है।


कुल क्षेत्रफल: 57.037 हेक्टेयर।

मगरमच्छों की संख्या: लगभग 250

प्रमुख सुविधाएं: पैगोडा, कैफेटेरिया, ऊर्जा पार्क और मिनी थिएटर

कनेक्टिविटी: जांजगीर से 25 किमी और बिलासपुर से 30 किमी की दूरी। निकटतम स्टेशन कोटमीसोनार (1 किमी) है।

आने वाले समय में वन विभाग यहाँ ‘कैप्टिव ब्रीडिंग’ और प्राकृतिक वातावरण में नवजात शिशुओं के जीवित रहने की दर बढ़ाने के लिए नई तकनीकों पर काम कर रहा है। इससे न केवल वन्यजीवों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी जगह बनाएगा।

See also  सुप्रीम फैसला : CBI जांच के लिए अब राज्य की सहमति जरूरी