टीआरपी डेस्क। भारतीय करेंसी मार्केट के लिए आज का दिन बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की बढ़ती ताकत के सामने भारतीय रुपया ताश के पत्तों की तरह ढह गया है। इतिहास में पहली बार रुपया 93 के स्तर को पार कर गया है, जिससे इंपोर्टेड महंगाई (Imported Inflation) बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

बाजार खुलते ही दिखा गिरावट का दौर

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज से मिली जानकारी के मुताबिक, आज सुबह लोकल करेंसी डॉलर के मुकाबले 92.92 पर खुली थी। लेकिन कुछ ही देर में दबाव इतना बढ़ा कि रुपया 93 का आंकड़ा पार कर 93.08 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। बुधवार को रुपया 92.89 पर बंद हुआ था। पिछले बंद भाव के मुकाबले रुपया 19 पैसे और टूट गया है। घरेलू शेयर बाजार में आज जो सकारात्मक शुरुआत हुई है, उसने रुपये को और ज्यादा गिरने से फिलहाल रोक रखा है।

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क्यों टूट रही है भारतीय करेंसी?

आर्थिक विशेषज्ञों ने रुपये में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण बताए हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं। दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है, जिसका सीधा दबाव रुपये पर पड़ा है।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

गौरतलब है कि रुपये के कमजोर होने का सीधा मतलब है कि अब हमें विदेश से सामान मंगाना महंगा पड़ेगा। इसका असर आपकी जिंदगी पर कुछ इस तरह दिखेगा

पेट्रोल-डीजल: कच्चे तेल का आयात महंगा होने से आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं।

विदेशी पढ़ाई और ट्रिप: अगर आपका बच्चा विदेश में पढ़ रहा है या आप फॉरेन ट्रिप का प्लान कर रहे हैं, तो अब आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।

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महंगे होंगे इलेक्ट्रॉनिक्स: मोबाइल, लैपटॉप और अन्य विदेशी कलपुर्जे महंगे हो सकते हैं, जिससे घरेलू बाजार में इलेक्ट्रॉनिक सामानों के दाम बढ़ेंगे।

दरअसल, फिलहाल रुपये में राहत के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। अगर वैश्विक हालात और कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में करेंसी मार्केट में और अस्थिरता देखी जा सकती है।