टीआरपी डेस्क। PM Modi Middle East War Meeting: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध की धमक ने भारत सरकार के कान खड़े कर दिए हैं। रविवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बेहद अहम और उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस मीटिंग में पीएम मोदी ने पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक (खाद) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की बारीकी से समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार, सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि युद्ध चाहे कितना भी खिंचे, भारत में जरूरी चीजों की किल्लत नहीं होनी चाहिए।

पेट्रोल-डीजल और खेती पर बड़ा संकट

मिली जानकारी के अनुसार इस बैठक का मुख्य मकसद देश में तेल, गैस और खाद की सप्लाई चेन को बिना किसी रुकावट के चालू रखना है। पीएम मोदी ने वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे वैश्विक घटनाक्रमों पर 24 घंटे नजर रखें ताकि आम उपभोक्ताओं और उद्योगों को किसी भी झटके से बचाया जा सके।

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इन मुद्दों पर हुई चर्चा

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, जिसे सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती है। साथ ही रबी और खरीफ की फसलों के लिए खाद की किल्लत न हो, इसके लिए वैकल्पिक रास्तों पर चर्चा हुई। इसके अलावा इंटरनेशनल ट्रेड रूट में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए दूसरे देशों से तालमेल बिठाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

होर्मुज स्ट्रेट- जहां फंसा है दुनिया का 20% तेल

गौरतलब है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यह वही समुद्री रास्ता है जहाँ से दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। ईरान ने इजरायल और पड़ोसी देशों पर हमले के बाद इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही बहुत कम कर दी है।

ग्लोबल लीडर्स के संपर्क में पीएम मोदी

बता दें कि 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी लगातार दुनिया के बड़े नेताओं के संपर्क में हैं। उन्होंने सऊदी अरब, यूएई, कतर, इजरायल और ईरान समेत 10 से ज्यादा देशों के प्रमुखों से फोन पर बात की है। पीएम का जोर इस बात पर है कि बातचीत के जरिए शांति बहाली हो और सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें दूर की जा सकें।

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