रायपुर। छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में आज 24 मार्च 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। बस्तर के जंगलों में खौफ का पर्याय माना जाने वाला खूंखार नक्सली पापा राव आज हथियार डालने जा रहा है। दरअसल, पापा राव अपने दर्जनभर साथियों के साथ जंगल से निकलकर बीजापुर जिला मुख्यालय के लिए रवाना हो चुका है। सूत्रों ने बताया है कि उसके साथ एके-47 और एसएलआर जैसे घातक हथियार भी हैं, जिन्हें वह आज प्रशासन के सामने सरेंडर करेगा।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा का बड़ा दावा: अब नहीं बचा कोई बड़ा कैडर

कवर्धा में मीडिया से चर्चा करते हुए प्रदेश के गृहमंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बड़ा एलान किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, छत्तीसगढ़ में आज से सशस्त्र नक्सलवाद का खात्मा होने जा रहा है। उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि 25 लाख रुपये के इनामी पापा राव के आत्मसमर्पण के बाद अब छत्तीसगढ़ में नक्सल संगठन का कोई भी बड़ा चेहरा या कैडर बाकी नहीं रह गया है। गौरतलब है कि पापा राव का सरेंडर बस्तर के लिए शांति की एक नई सुबह जैसा है।

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कौन है पापा राव? जिसे बस्तर का कोना-कोना है जुबानी याद

ग्राउंड सूत्रों के अनुसार, 56 वर्षीय पापा राव उर्फ मंगू सुकमा जिले का रहने वाला है और दोरला जनजाति से आता है। माओवादी संगठन में उसका कद कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह DKSZCM (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) का मेंबर है।

उसे बस्तर के चप्पे-चप्पे की जानकारी है, जिसकी वजह से वह दर्जनों मुठभेड़ों में सुरक्षाबलों को चकमा देकर भागने में सफल रहा। उसके पास हमेशा अपनी भरोसेमंद एके-47 राइफल रहती है। वह पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का अहम सदस्य भी रहा है।

दशकों का संघर्ष और सरेंडर की इनसाइड स्टोरी

दरअसल, पापा राव के सरेंडर करने के फैसले के पीछे सुरक्षाबलों का बढ़ता दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति को बड़ी वजह माना जा रहा है। बीजापुर जिला मुख्यालय में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पापा राव के साथ आने वाले उसके साथी भी बड़े कैडर के नक्सली हो सकते हैं। इस सरेंडर के साथ ही बस्तर के उन इलाकों में विकास की राह खुलेगी जहां दशकों से सड़क और बिजली नहीं पहुँच पाई थी।

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पापा राव के सरेंडर का सबसे बड़ा असर बस्तर के आम आदिवासियों पर पड़ेगा। अब बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा के अंदरूनी इलाकों में लाल आतंक का साया खत्म होगा, जिससे स्कूल, अस्पताल और सड़कों का निर्माण तेज हो सकेगा। रायपुर के जानकारों का मानना है कि इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ को आधिकारिक तौर पर नक्सल मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, जो प्रदेश के निवेश और पर्यटन के लिए मील का पत्थर साबित होगी।