टीआरपी। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने 25 मार्च 2026 को जगदलपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में ऐतिहासिक घोषणा की है। उन्होंने दृढ़ विश्वास के साथ कहा कि राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के साझा प्रयासों से छत्तीसगढ़ 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।
यह घोषणा बस्तर के आदिवासियों और स्थानीय निवासियों के लिए ‘भय मुक्त’ भविष्य की गारंटी है। नक्सलवाद के खात्मे से बस्तर के अंदरूनी इलाकों में सड़क, स्कूल, और अस्पतालों का जाल बिछेगा, जिससे जल-जंगल-जमीन पर स्थानीय समुदाय का अधिकार सुरक्षित और मजबूत होगा।
टूटी नक्सलवाद की कमर: 5000 कैडर हुए कम
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर राज्य सरकार ने प्रभावी रणनीति अपनाई है। पिछले दो वर्षों में 3 हजार से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 500 से अधिक मुठभेड़ों में ढेर हुए हैं। वर्तमान में डीकेजेडसी (DKJZC) स्तर का कोई भी सक्रिय माओवादी छत्तीसगढ़ में शेष नहीं है।
हाल ही में बड़े नक्सली नेता पापा राव का अपने साथियों सहित मुख्यधारा में लौटना इस बात का प्रमाण है कि अब नक्सल संगठन का शीर्ष ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। अब केवल 30 से 40 की सीमित संख्या में नक्सली दूरस्थ क्षेत्रों में बचे हैं, जिनके जल्द सरेंडर करने की उम्मीद है।
कैंप अब बनेंगे विकास के केंद्र
शर्मा ने भविष्य की योजना साझा करते हुए कहा कि बस्तर के आंतरिक क्षेत्रों में स्थापित 400 सुरक्षा कैंपों को चरणबद्ध तरीके से विकास केंद्रों में बदला जाएगा। ये कैंप आने वाले समय में थाना, स्कूल, अस्पताल और लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्रों के रूप में कार्य करेंगे।
इस अवसर पर मंत्री केदार कश्यप, विधायककिरण सिंहदेव और डीजीपी अरुण देव गौतम सहित वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी उपस्थित रहे। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि बस्तर अब हिंसा के अतीत को पीछे छोड़कर शांति और विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है।
लक्ष्य तिथि: 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ पूर्ण नक्सल मुक्त।
बड़ी सफलता: पिछले 2 वर्षों में कुल 5000 सशस्त्र कैडरों की कमी आई।
भौगोलिक स्थिति: बस्तर का 95 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र अब नक्सल प्रभाव से बाहर।
मुक्त जिले: कबीरधाम, राजनांदगांव, धमतरी और महासमुंद जैसे जिले अब पूरी तरह सुरक्षित।
सरकार अब ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने पर ध्यान केंद्रित करेगी। नक्सल मुक्त होने के बाद छत्तीसगढ़ देश के लिए शांति और सुशासन का एक ‘आदर्श मॉडल’ बनकर उभरेगा।



