रायपुर। साइबर ठगों का जाल देश भर में फैला हुआ है। देश के प्रमुख शहरों में बैठकर साइबर ठग विदेशियों को भी चूना लगा रहे हैं। ऐसे शहरों में अब रायपुर भी शुमार हो गया है। यहां साइबर ठगी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो शहर के बीचों-बीच बैठकर विदेशी नागरिकों को लाखों डॉलर का चूना लगा रहा था।

क्राइम ब्रांच और रायपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने गंज थाना क्षेत्र, राजेंद्र नगर और फाफाडीह जैसे पॉश इलाकों में चल रहे तीन फर्जी कॉल सेंटरों पर एक साथ छापा मारा। कार्रवाई में 40 से अधिक युवकों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें ज्यादातर बाहर राज्यों से लाए गए थे।

देर रात शुरू होता था ऑनलाइन ठगी का धंधा

पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि यह पूरा नेटवर्क रात के समय एक्टिव होता था। वजह साफ थी, अमेरिका और यूरोप के टाइम जोन के हिसाब से काम करना। देर रात शुरू होने वाले इन कॉल सेंटरों से विदेशी नागरिकों को कॉल कर तकनीकी सहायता के नाम पर जाल में फंसाया जाता था।

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ब्रांड का नाम बताकर ठगी का कारोबार

गिरोह के सदस्य खुद को Apple और Amazon जैसी बड़ी कंपनियों का कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव बताकर लोगों को भरोसे में लेते थे। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने फर्जी हेल्पलाइन नंबरों को इस तरह इंटरनेट पर सेट किया था कि गूगल सर्च में सबसे ऊपर दिखाई दें। इसके बाद ‘टेक सपोर्ट’ के नाम पर डॉलर में रकम वसूली जाती थी।

पूरा सेटअप जब्त किया पुलिस ने

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 20 लैपटॉप, 50 डेस्कटॉप और 50 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन डिवाइसेज़ में ठगी से जुड़ा डेटा और विदेशी ग्राहकों की जानकारी मिलने की संभावना है, जिसकी जांच जारी है।

कई राज्यों के ‘ऑपरेटर’ बुलाकर चला रहे थे कारोबार

इस नेटवर्क को चलाने के लिए गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार से युवकों को रायपुर बुलाया गया था। उन्हें 15 से 20 हजार रुपए मासिक वेतन देकर कॉलिंग का काम कराया जाता था, जबकि असली मुनाफा गिरोह के सरगना के पास जाता था।

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मास्टरमाइंड की हो रही है तलाश

फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि डेटा लीक का स्रोत क्या है और इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन कितने गहरे हैं। जरूरत पड़ने पर विदेशी जांच एजेंसियों से भी संपर्क किया जा सकता है।