रायपुर। आबकारी विभाग द्वारा कांच की जगह प्लास्टिक (आरपीईटी) की बोतलों में शराब भरने के निर्णय को लेकर विरोध सामने आने लगा है। छत्तीसगढ़ बॉटल एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने आबकारी कमिश्नर आर. संगीता से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। इस पर आबकारी कमिश्नर आर. संगीता ने कहा कि यह निर्णय सरकार की नीति के तहत लिया गया है, लेकिन यदि एसोसिएशन के पास वैज्ञानिक अध्ययन या रिपोर्ट है, तो विभाग उस पर चर्चा करने तैयार है। इस विषय को आबकारी मंत्री के समक्ष रखा जाएगा।
बॉटल एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज मलिक ने कहा कि प्रदेश में कांच की बोतलों की रिसाइकिलिंग से जुड़ा एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। इससे लाखों लोगों की आजीविका चलती है। उन्होंने कहा कि यदि प्लास्टिक बोतलों का उपयोग बढ़ता है, तो कांच की बोतलों की मांग घटेगी और इससे कई लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है।
एसोसिएशन के सदस्य अकरम कुरैशी और सोहन लाल देवांगन ने भी कहा कि कांच से जुड़े कामगार, कबाड़ी और छोटे कारोबारी इस बदलाव से सीधे प्रभावित होंगे।
नुकसानदायक हो सकती हैं प्लास्टिक की बोतलें
सदस्य फिरोज खान और दीपक जायसवाल ने कहा कि प्लास्टिक बोतलों में लंबे समय तक शराब रखने से ‘लीचिंग’ का खतरा बढ़ सकता है। उनका कहना था कि इससे रासायनिक तत्व पेय पदार्थ में घुलने की आशंका रहती है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
150 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व, कीमत भी घटेगी
बताया जा रहा है कि प्लास्टिक बोतल निर्माण में देरी या तैयारी न होने पर इनके उपयोग की डेट आगे बढ़ सकती है। यानी तब तक कांच की बोतलों का इस्तेमाल होता रहेगा। प्लास्टिक बोतल का आदेश वापस नहीं होगा। दूसरा यह कि प्लास्टिक की बोतलों में बेचने से शराब की कीमतें भी कम की जा रही है। आबकारी निगम ने देशी विदेशी शराब के प्रति पेंटी आफर रेट में 50 रूपए कम कर दिया है। इससे निगम को लगभग 150 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा।



