कोरबा। कटघोरा वन मंडल के केंदई रेंज में करंट प्रवाहित बिजली तार की चपेट में आने से एक मादा भालू और उसके दो मासूम शावकों की मौत हो गई। इस घटना ने वन्यजीव सुरक्षा और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डाल के गिरने से टूटा बिजली का तार
बताया जा रहा है कि सलईगोठ गांव के ग्रामीण जब खेत की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने जंगल के भीतर 11 केवी बिजली लाइन टूटी हुई देखी। पास जाकर देखा तो वहां मादा भालू और उसके दो शावकों के शव पड़े थे।
दरअसल पेड़ की भारी डाल गिरने से बिजली तार टूट गया था। पोल की अर्थिंग भी बाधित हो गई, जिससे तार में लगातार करंट बना रहा। यही करंट इन बेजुबान जानवरों के लिए जानलेवा साबित हुआ।

हो सकता था गंभीर हादसा
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके की बिजली सप्लाई तो बंद कर दी गई थी, लेकिन जंगल से गुजर रही 11 केवी लाइन में करंट चालू रहा। अगर कोई ग्रामीण या मवेशी इसकी चपेट में आ जाता, तो भी बड़ा हादसा हो सकता था।
वन संरक्षण अधिनियम का हुआ उल्लंघन
वन विभाग की शुरुआती जांच में सामने आया है कि संबंधित क्षेत्र में 11 केवी ट्रांसमिशन लाइन बिना पूर्व अनुमति के बिछाई गई थी। यह सीधे तौर पर वन संरक्षण अधिनियम 1980 का उल्लंघन है।
बिजली कंपनी पर कार्यवाही की सिफारिश
केंदई रेंज कार्यालय ने इस मामले में कटघोरा वन मंडल के डीएफओ को पत्र लिखकर संबंधित ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी निशांत कुमार ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है। विभाग ने जांच शुरू कर दी है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।




