ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी भीषण जंग को एक महीना बीत चुका है। तबाही का मंजर ऐसा है कि ईरान के स्कूल, बाजार और दफ्तरों में सन्नाटा पसरा है, लेकिन इस बारूद के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने दुनिया को भावुक कर दिया है। मुश्किल वक्त में घिरे ईरान के लिए भारत के नन्हे बच्चों ने अपने गुल्लक खोल दिए हैं।
“हम यह कर्ज कभी नहीं भूलेंगे” – भावुक हुआ ईरानी दूतावास
दरअसल, सोशल मीडिया पर ईरान के दूतावास ने कुछ तस्वीरें साझा की हैं। बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर समेत भारत के कई हिस्सों से बच्चों ने अपनी जमा पूंजी (गुल्लक) ईरान की मदद के लिए दान कर दी है। ईरानी दूतावास ने इसे ‘प्यार भरा तोहफा’ बताते हुए कहा है कि इन नन्हे हाथों ने जो समर्थन दिया है, उसे इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
A gift from the small yet love-filled hearts of Indian children to their classmates at #Minab School in Iran;
— Iran in India (@Iran_in_India) March 27, 2026
When an Indian child, with tiny hands, offers their piggy bank as a gift to the children of Iran.
Friday, 27/3/ 2026
Iran Embassy – New Delhi
We will never forget your… pic.twitter.com/Q8Nxk6ttDs
हालांकि, जंग की जमीनी हकीकत डरावनी है। ईरान में अब तक करीब 92,662 रिहायशी घर और दफ्तर मलबे में तब्दील हो चुके हैं। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के बड़े खुजेस्तान और इस्फहान स्टील प्लांट्स को निशाना बनाया है। लगातार बमबारी से ईरान के पार्क और स्कूल बंद हैं, आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो चुका है।
कुछ हफ्तों में खत्म होगी जंग? अमेरिका का बड़ा दावा
गौरतलब है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बड़ा बयान दिया है। फ्रांस में G7 बैठक के बाद उन्होंने कहा कि यह जंग महीनों नहीं, बल्कि कुछ ही हफ्तों में खत्म हो सकती है। खास बात यह है कि अमेरिका ने साफ किया है कि उसे ईरान में जमीनी सेना (Ground Troops) भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, वह हवाई हमलों से ही अपने लक्ष्य हासिल कर लेगा।
ईरानी संसद की चेतावनी- “पैर रखा तो अंजाम बुरा होगा”
इधर, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने अमेरिका को खरी-खरी सुनाई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने अपनी जमीनी सेना ईरान की धरती पर उतारी, तो वह अपने सैनिकों की लाशें गिनते रह जाएगा। बता दें कि इस जंग में अब तक 303 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जिनमें से अधिकतर को ड्रोन हमलों की वजह से दिमागी चोटें (TBI) आई हैं।


