टीआरपी डेस्क: अगर आप मॉल में शॉपिंग करते वक्त या किराने की दुकान पर पेमेंट के लिए यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान हो जाइए। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। 1 अप्रैल 2026 से डिजिटल ट्रांजैक्शन के नियम पूरी तरह बदलने वाले हैं।

क्या है नया नियम?

आरबीआई के आदेश के अनुसार, अब बैंकों को टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य रूप से लागू करना होगा। इसका मतलब है कि अब आप केवल एक ओटीपी (OTP) के भरोसे पेमेंट नहीं कर पाएंगे। सितंबर 2025 में जारी इस आदेश के लिए 1 अप्रैल 2026 की समयसीमा तय की गई है। अब हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए कम से कम दो अलग और स्वतंत्र वेरिफिकेशन फैक्टर की जरूरत होगी।

कैसे काम करेगा नया ऑथेंटिकेशन?

अब तक कई ट्रांजैक्शन सिर्फ एक ओटीपी से पूरे हो जाते थे, लेकिन अब सुरक्षा की एक और परत जोड़ी जाएगी। ऑथेंटिकेशन के लिए बैंक इनमें से किन्हीं दो तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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कुछ ऐसा जो आपको पता हो: जैसे पिन (PIN) या पासवर्ड

कुछ ऐसा जो आपके पास हो: जैसे ओटीपी (OTP) या कार्ड

बायोमेट्रिक्स: जैसे फिंगरप्रिंट या फेस आईडी

क्यों पड़ी इस नियम की जरूरत?

दरअसल, पिछले कुछ समय में साइबर ठगों ने ओटीपी चोरी या सिम स्वैपिंग के जरिए लोगों के बैंक खातों में सेंध लगाई है। आरबीआई का मानना है कि टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से डिजिटल चोरी पर लगाम लगेगी। गौरतलब है कि क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन में यह नियम पहले से ही लागू है, लेकिन अब इसे सभी डिजिटल पेमेंट और इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन पर भी अनिवार्य कर दिया गया है।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

मैदानी सूत्रों के अनुसार, इस नियम से ट्रांजैक्शन करने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है, लेकिन आपका पैसा पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा। 1 अप्रैल के बाद यदि आप दूसरा वेरिफिकेशन फैक्टर पूरा नहीं करते हैं, तो आपका पेमेंट फेल हो सकता है।

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