अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले के बिकापुर क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के एक ठेकेदार ने विभागीय अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। इस घटना ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है और पूरे मामले को लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
गुणवत्तापूर्ण काम मगर अब तक भुगतान नहीं
मिली जानकारी के अनुसार, ठेकेदार रजनीकांत अग्रवाल ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने विभाग द्वारा सौंपे गए कार्यों को समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा कर लिया है, इसके बावजूद उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है। रजनीकांत ने आरोप लगाया कि भुगतान के एवज में उनसे कमीशन की मांग की जा रही है और मना करने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

ठेकेदार ने इस संबंध में कलेक्टर सरगुजा के नाम एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि यदि जल्द ही उनका बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो वे आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। इस चेतावनी के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है।
कलेक्टर सरगुजा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रशासन ने यह भी कहा है कि किसी भी परिस्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।

विभाग का क्या है कहना..?
इस मामले में PHE अंबिकापुर के EE ओंकार सिंह का कहना है कि मामला जलजीवन मिशन का है और संबंधित ठेकेदार को विभाग ने कोई काम ही नहीं दिया है। पता चला है वह पेटी कॉन्ट्रैक्टर है और किसी ठेकेदार से कम लिया हुआ है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि संबंधित ठेकेदार को लगभग 80 प्रतिशत का भुगतान कर दिया गया है। EE ने बताया कि संबंधित उपयंत्री को नोटिस जारी किया गया है और पूरी शिकायत की जांच की जा रही है।

उधर इस वाकए के बाद ठेकेदारों और स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। मामले का ज्ञापन देने के दौरान दूसरे ठेकेदार भी मौजूद रहे और भुगतान में आ रही दिक्कतों का खुलासा किया। कई ठेकेदारों का कहना है कि विभागीय स्तर पर भुगतान में देरी और अनियमितताओं की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन उन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। एक अफसर की शिकायत भी इन्होंने की और अफसर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ऐसे में यह मामला एक बड़े मुद्दे के रूप में उभरता दिख रहा है। देखना है कि इसका क्या परिणाम निकल कर सामने आता है।


