रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान की खरीदी के दौरान प्रदेश भर में उजागर हुए करोड़ों के घोटाले के बाद अब कस्टम मिलिंग के चावल की तथाकथित खरीदी में एक अफसर ने घोटाले का ऐसा तरीका अपनाया कि दूसरे अफसर और राइस मिलर भी दंग हैं। इस मामले के उजागर होने के बाद सरकार को भी विधानसभा में जवाब देना पड़ा और अफसरों पर कार्रवाई करनी पड़ी।

असली खेल हो रहा है चावल में

दरअसल प्रदेश भर में किसानों से धान खरीदी की प्रक्रिया कुछ महीनों तक चली। चूंकि धान की अच्छी कीमत मिल रही थी, इसलिए छत्तीसगढ़ से बाहर का धान यहां खपाया गया और करोड़ों रूपये के वारे-न्यारे किए गए, मगर असली खेल तो चावल में होता है, जहां राइस मिलर्स से मिलीभगत करके चावल के नाम पर ब्रोकन राइस (कनकी) खपाया जा रहा है और लंबा-चौड़ा खेल किया जा रहा है। ऐसा करके धान से भी ज्यादा कमाई की जा रही है। इसी तरह का एक खेल कोरबा जिले में किया गया, जिसके उजागर होने के बाद अब सरकार की जमकर किरकिरी हो रही है।

राइस मिलर्स ने ही दिया घोटाले का सुराग

धान की खरीदी और फिर राइस मिलर्स से उसकी कस्टम मिलिंग (कुटाई) कराके सरकार, दिए गए धान के बदले में एक निश्चित मात्रा में चावल लेती है। धान की कुटाई के दौरान स्वाभाविक है कि चावल टूटता है, इसलिए सरकार राइस मिलर से चावल लेते समय अधिकतम 25% तक कनकी याने ब्रोकन राइस की मात्रा स्वीकार करती है। मगर यहां पदस्थ रहे एक अफसर ने ऐसा घनचक्कर चलाया कि किसी को घोटाले का अहसास तक नहीं हुआ।

बता दें कि, छत्तीसगढ़ में किसानों से धान खरीदी का काम मार्कफेड के जरिए होता है, वहीं कस्टम मिलिंग के बाद चावल को नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के गोदाम में जमा किया जाता है। किसी भी राइस मिलर के द्वारा चावल लेकर गोदाम पहुंचने के बाद सबसे पहले चावल की गुणवत्ता की जांच क्वालिटी इंस्पेक्टर (क्यू आई) द्वारा की जाती है। ऐसे ही तमाम क्यू आई से मिलीभगत करके चावल की अफरा-तफरी की जा रही है।

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कोरबा जिले में नान के गोदाम में घटिया चावल खपाए जाने की सूचना कुछ स्थानीय मिलर्स ने मुख्यालय में दी। दरअसल यह घोटाला अक्टूबर-नवम्बर 2025 दौरान किया गया और तब नान, कोरबा में प्रमोद जांगड़े प्रभारी प्रबंधक के तौर पर पदस्थ थे। अब तक हुए खुलासे में इस घोटाले के मास्टर माइंड जांगड़े ही थे। शक है कि उन्होंने दूसरे जिलों के प्रबंधकों और क्यू आई से मिलीभगत करके घटिया चावल नान के गोदाम में खपाया। इस घोटाले का सुराग कोरबा जिले के ही कुछ राइस मिलर्स ने लिखित में दिया और बाकायदा यह भी बताया कि नान के किस गोदाम में कितने नंबर के लॉट का चावल गुणवत्ताहीन है।

अपने ही जिले में बैठकर अच्छे चावल की दे दी रिपोर्ट

बता दें कि, नान में जब भी कभी ज्यादा मात्रा में चावल की खेप पहुंचे और उसकी गुणवत्ता की जांच के लिए क्वालिटी इंस्पेक्टर (QI) कम पड़ जाएं तब दूसरे जिले के क्यू आई की सेवाएं ली जा सकती हैं। हालांकि इसके लिए मुख्यालय की अनुमति लेनी होती है और तब क्यू आई की अपनी आई डी उसके जिले में निलंबित रहती है और वह जिस जिले में जाएगा वहां उसकी आई डी मान्य की जाती है। लेकिन, जिला प्रबंधक प्रमोद जांगड़े ने योजनाबद्ध तरीके से बालोद, बेमेतरा और जशपुर सहित कुछ अन्य जिलों के क्यू आई की आईडी का उपयोग कर चावल उठाव किया।

मतलब यह हुआ कि इन जिलों के क्यू आई कोरबा आए ही नहीं और उनकी तरफ से चावल के लॉट यानी ढेर से अच्छी गुणवत्ता की रिपोर्ट ही दे दी गई। जांगड़े द्वारा किए गए इस खेल की जानकारी मिलने पर राइस मिलर ही नहीं, अफसर भी दंग हैं, क्योंकि मुख्यालय में लिखित आदेश के बिना कोई भी क्वालिटी इंस्पेक्टर दूसरे जिले में लॉट की जांच रिपोर्ट नहीं बना सकता और न ही आईडी ट्रांसफर कर सकता है।

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करोड़ों के वारे-न्यारे

इस तरह संबंधित जिलों के प्रबंधकों से मिलीभगत करके 8,153 क्विंटल चावल को कोरबा के नान के गोदाम में खपाया गया, जो वितरण योग्य नहीं था, और उसकी कीमत करीब 3 करोड़ 34 लाख रुपये बताई गई है।

अब तक 4 पर गिरी गाज, मामला विधान सभा में

चावल के इस घोटाले के उजागर होने के बाद नान की राज्य स्तरीय टीम द्वारा जांच की जाती रही। इस बीच विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप द्वारा इस घोटाले को लेकर सवाल किया गया। इसका जवाब प्रस्तुत करने से कुछ दिन पहले ही नान कोरबा के प्रबंधक रहे प्रमोद जांगड़े को निलंबित कर दिया गया, जिसे घोटाले के उजागर होने के बाद तबादले पर कोरिया भेज दिया गया था। हालांकि इससे पूर्व यहां पदस्थ रहे क्यू आई प्रकाश बरेठ और एक अन्य को सस्पेंड किया जा चुका था। इस घोटाले में सबसे ज्यादा घटिया चावल की गुणवत्ता जांचने वाले बेमेतरा के क्यू आई महेश्वर लाल सोनवानी को भी निलंबित किया गया।

इन राइस मिलर्स को चावल बदलने का नोटिस

इस घोटाले की जांच में चावल के 26 लॉट अमानक पाए गए, जिनकी आपूर्ति 15 राइस मिलर्स द्वारा की गई थी। इनमें से 7 कोरबा जिले के और 8 दीगर जिलों के हैं। सभी को नोटिस जारी कर कुल 8,153 क्विंटल चावल के स्थान पर अच्छा चावल देने को कहा गया है। इनमें महिमा मिनी राइस मिल, छुरी; बाबा श्री फ़ूड प्रोडक्ट; मां बम्लेश्वरी मिल; श्री राजाराम राइस उद्योग; ओम एग्रो; श्री आंजनेय राइस प्रोडक्ट; मेसर्स सुरभि राइस प्रोडक्ट (सभी कोरबा जिले के) शामिल हैं। इनके अलावा श्री लक्ष्मी निधि राइस मिल, सक्ती; कान्हा ग्रेन प्रोसेस, रायपुर; मे. कचरूलाल जितेंद्र कुमार, रायपुर; परबाइलिंग प्लांट नेवरा, रायपुर; बालाजी राइस इंडस्ट्रीज, रायपुर; लख दातार राइस इंडस्ट्रीज, सक्ती; श्री मंगलम एग्रो प्रोडक्ट, सक्ती; श्री श्याम राइस उद्योग, रायपुर; बालाजी राइस इंडस्ट्रीज, रायपुर शामिल हैं। जिन्हें केवल चावल रिप्लेस करने को कहा गया है, ब्लैकलिस्टेड नहीं किया गया है।

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यह तो नमूना भर है

कोरबा में जो घोटाला उजागर हुआ है वह थोड़ा अलग तरीके का जरूर है, मगर नमूना भर है। पूरे प्रदेश में इस तरह सरकारी चावल का घोटाला हो रहा है और पूरी मिलीभगत से चल रहा है। सच तो यह है कि कोरबा जिले के उपभोक्ता भंडारों में आज भी घटिया चावल बंट रहा है, जानकार बताते हैं कि रोके गए कुछ अमानक चावल के लॉट आबंटित कर दिए गए, या फिर उजागर हुए घोटाले से पहले भी नान में राइस मिलर्स से घटिया चावल लिया गया है जो अब भी बंट रहा है। खाद्य विभाग इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई सुध नहीं ले रहा है।

चावल में कनकी है या..

घोटाले का आलम यह है कि मिलर चावल में कनकी नहीं बल्कि कनकी में चावल मिलाकर खपा रहे हैं। इसका नमूना देखना है तो प्रदेश के किसी भी जिले में सरकारी राशन दुकान चले जाइए। यहां बोरे में रखे चावल पर नजर डालिए और राशन के लिए कतार में खड़े किसी भी शख्स से चावल के बारे में पूछिए। तब वह बताएगा कि चावल अच्छा नहीं है, इसमें कनकी ज्यादा है और इसे पकाओ तो वह अक्सर गीला हो जाता है।

आलम यह है कि चावल अमानक होने के चलते अधिकांश लोग इसे दुकानदार को ही बेच देते हैं और रुपए लेकर चल देते हैं। बाद में यही चावल घूम-फिरकर राइस मिलों में पहुँच जाता है और मेरी-गो-राउंड की तरह वही चावल वापस दुकानों में पहुंचता रहता है। ऐसा लगता है कि इस दुर्व्यवस्था को सुधार पाना चाहकर भी संभव नहीं होगा।