टीआरपी डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक ऐसा फैसला लिया है जिसने पूरी दुनिया के बाजार में खलबली मचा दी है। ट्रंप प्रशासन ने कुछ खास ब्रांडेड दवाओं के आयात पर 100% टैरिफ (सीमा शुल्क) लगाने का कड़ा आदेश जारी किया है।

अगस्त-सितंबर से लागू होंगे नए नियम

दरअसल, व्हाइट हाउस से जारी इस आदेश के बाद अब विदेशी दवाओं पर अमेरिका की निर्भरता कम करने की तैयारी है। यह आदेश 2 अप्रैल, 2026 को जारी किया गया है, जो पिछले साल शुरू हुई सेक्शन 232 की जांच पर आधारित है। कंपनियों को संभलने के लिए 120 से 180 दिनों का समय दिया गया है। उम्मीद है कि अगस्त और सितंबर 2026 के बीच ये भारी-भरकम टैरिफ शुरू हो जाएंगे। जो कंपनियां अपनी कीमतें कम करेंगी या अपना प्रोडक्शन अमेरिका शिफ्ट करेंगी, उन्हें 10% से 20% तक ही ड्यूटी देनी होगी।

इन देशों की बढ़ी टेंशन, भारत को क्यों नहीं खतरा?

गौरतलब है कि ट्रंप के इस फैसले की सबसे ज्यादा गाज आयरलैंड, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, जापान और ब्रिटेन जैसे देशों पर गिरने वाली है। ये देश अमेरिका को महंगी और पेटेंट वाली दवाएं सप्लाई करते हैं। बता दें कि भारत के लिए सुकून वाली बात यह है कि हम अमेरिका को सबसे ज्यादा जेनेरिक दवाएं भेजते हैं। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली कुल दवाओं में 90% हिस्सा जेनेरिक का है, जिन्हें फिलहाल इस 100% टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है। यह छूट करीब एक साल तक जारी रह सकती है ताकि वहां दवाओं की किल्लत न हो।

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आम जनता पर असर

औद्योगिक क्षेत्रों में दवा सप्लाई चेन से जुड़े जानकारों का मानना है कि भारत ने साल 2025 में अमेरिका को करीब 9.7 अरब डॉलर की दवाएं भेजी थीं। लेकिन, जो भारतीय कंपनियां ब्रांडेड दवाएं या पेटेंट दवाओं का कच्चा माल (API) अमेरिका भेजती हैं, उन पर दबाव बढ़ सकता है। स्थानीय बाजार में फिलहाल कीमतों पर कोई सीधा असर नहीं दिखेगा, लेकिन ग्लोबल मार्केट में हलचल से दवा कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव संभव है। अमेरिकी प्रशासन का यह रुख साफ करता है कि वे अब व्यापारिक समझौतों के बजाय कंपनी के स्तर पर सख्ती बरतेंगे। यानी अगर किसी कंपनी को राहत चाहिए, तो उसे ट्रंप की शर्तों पर खरा उतरना होगा। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय भी इस पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा की जा सके।