टीआरपी। रायपुर नगर निगम की हालिया सामान्य सभा में तात्यापारा चौक के चौड़ीकरण और प्रभावितों के मुआवजे का मुद्दा गरमा गया है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने 30 मार्च को सदन में प्रमुखता से इस मुद्दे को उठाते हुए महापौर और राज्य सरकार पर प्रभावितों की अनदेखी का आरोप लगाया। तिवारी ने कहा कि महापौर ने पहले आश्वासन दिया था, लेकिन एक साल बीतने और दूसरा बजट पेश होने के बाद भी प्रभावितों के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया।
तात्यापारा रोड राजधानी के सबसे व्यस्त और पुराने व्यापारिक क्षेत्रों में से एक है। सड़क चौड़ीकरण के कारण सैकड़ों व्यापारियों और निवासियों का रोजगार और आशियाना प्रभावित हो रहा है। मुआवजे में देरी और ओवरब्रिज निर्माण के नए प्रस्तावों ने स्थानीय लोगों के बीच अनिश्चितता और आक्रोश पैदा कर दिया है, जो आने वाले समय में एक बड़ा आंदोलन बन सकता है।
बजट में अनदेखी और भाजपा का विरोधाभास
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सदन में याद दिलाया कि महापौर ने खुद 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बजट में इसका जिक्र न होना समझ से परे है। उन्होंने भाजपा सरकार और स्थानीय विधायकों के बीच समन्वय की कमी पर भी तीखे सवाल दागे। तिवारी ने कहा, “एक ओर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल अपनी ही सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं, वहीं उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा की बात कर रहे हैं। भाजपा की मंशा आखिर है क्या?”
आकाश तिवारी ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित ओवरब्रिज के निर्माण को व्यापारियों पर ‘दोहरी मार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि एक तरफ भाजपा सरकार मुआवजा देने में विफल रही है, वहीं दूसरी ओर ओवरब्रिज बनाकर व्यापारियों के अस्तित्व पर संकट खड़ा किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु और विवाद
मुद्दा: तात्यापारा चौक चौड़ीकरण के प्रभावितों का मुआवजा।
आरोप: महापौर ने 10 करोड़ के प्रस्ताव के बाद भी बजट में कोई प्रावधान नहीं रखा।
विवाद: ओवरब्रिज निर्माण के प्रस्ताव को व्यापारियों के लिए नुकसानदेह बताया गया।
सियासी उलझन: सांसद बृजमोहन अग्रवाल और विधायक पुरंदर मिश्रा के बयानों में विरोधाभास का दावा।
तारीख: 30 मार्च की सामान्य सभा में नेता प्रतिपक्ष ने प्रमुखता से मांग रखी।
तात्यापारा के प्रभावितों का मुद्दा अब नगर निगम की दहलीज से निकलकर सड़क की लड़ाई बन सकता है। नेता प्रतिपक्ष ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रभावितों को तत्काल और उचित मुआवजा नहीं मिलता, वे सदन से सड़क तक संघर्ष जारी रखेंगे। वहीं, भाजपा के भीतर मुआवजे और ओवरब्रिज को लेकर चल रही अलग-अलग राय आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।


