रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के दावों के बीच एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। दरअसल, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) द्वारा जारी किए गए 50 से ज्यादा टेंडरों को एक ही महीने के भीतर रद्द करना पड़ा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ठेकेदारों का पुराने बकाये का भुगतान न होना बताया जा रहा है। पेमेंट लटकने की वजह से ठेकेदारों ने नए कामों में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिसके बाद विभाग को मजबूरी में इन टेंडरों को निरस्त करना पड़ा है।

किन प्रोजेक्ट्स पर लगा ग्रहण?

बता दें कि इन टेंडरों में प्रदेश के सुदूर इलाकों में बनने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), उप स्वास्थ्य केंद्र (SHC), फिजियोथेरेपी यूनिट और स्टाफ क्वार्टर जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य शामिल थे। इसके तहत नाबार्ड फंडेड प्रोजेक्ट ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए ये प्रोजेक्ट संजीवनी माने जा रहे थे। वहीं आयुष्मान हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत क्रिटिकल केयर ब्लॉक और 10-बेड आईसीयू जैसे काम अब लटक गए हैं। इन टेंडरों की अनुमानित लागत 20 लाख से लेकर 95 लाख रुपये तक थी।

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मैदान में क्यों नहीं उतरे ठेकेदार?

ग्राउंड सूत्रों की मानें तो CGMSC पर ठेकेदारों का लगभग 49.16 करोड़ रुपये का भुगतान पिछले कई महीनों से बकाया है। रायपुर के दफ्तरों के चक्कर काट रहे ठेकेदारों का कहना है कि जब पुराना पैसा ही नहीं मिला, तो नए काम में अपनी पूंजी कैसे फंसाएं? जनवरी में जारी टेंडरों की अंतिम तिथि फरवरी थी, लेकिन किसी भी वैध बोली के न आने पर विभाग को इन्हें रद्द करना पड़ा।

अधिकारी क्या कह रहे हैं?

हैरानी की बात यह है कि एक ओर जहां फाइलें टेंडर रद्द होने की गवाही दे रही हैं, वहीं CGMSC के जिम्मेदार टेंडर रद्द होने की बात से साफ इनकार किया है। हालांकि, विभाग के भीतर से आ रही खबरें और दस्तावेज कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

इस खींचतान का सबसे बुरा असर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और ग्रामीण क्षेत्रों की जनता पर पड़ेगा। अगर समय पर अस्पताल भवन और स्टाफ क्वार्टर नहीं बने, तो डॉक्टरों और नर्सों की तैनाती नहीं हो पाएगी। रायपुर और बिलासपुर जैसे शहरों के बाहर स्वास्थ्य सुविधाएं पहले ही कमजोर हैं, ऐसे में प्रोजेक्ट्स का रद्द होना गरीबों के इलाज के हक पर सीधा प्रहार है।

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