पारंपरिक थाली में शामिल विभिन्न प्रकार के अनाजों की रोटियां।

टीआरपी डेस्क। एक समय था जब मौसम के अनुसार अलग-अलग अनाज बड़े पैमाने पर उगाए और खाए जाते थे, जो हमारी थाली का अहम हिस्सा थे। लेकिन वक्त के साथ गेहूं की खेती बढ़ती गई और पारंपरिक अनाजों की रोटियां हमारे डेली रूटीन से कम होती गईं, जिससे आज ज्यादातर घरों में केवल गेहूं की रोटी ही बनाई जा रही है।

आज की बदलती जीवनशैली में फिर से इन अनाजों को अपनाना न केवल किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह लोगों की इम्यूनिटी, डाइजेशन और हड्डियों को मजबूत बनाने में भी काफी मददगार साबित हो सकता है।

मौसम के हिसाब से चुनें अपना अनाज


फिट और हेल्दी रहने के लिए डायटीशियन अब फिर से पुराने ढर्रे पर लौटने की सलाह दे रहे हैं। अनाजों में ढेरों न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं जो न सिर्फ आपको एनर्जेटिक रखते हैं, बल्कि आपकी मसल्स, त्वचा और बालों को भी हेल्दी बनाए रखते हैं।

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बाजरा और मक्का: सर्दियों के मौसम में बाजरा और मक्के की रोटी शरीर को गर्माहट देती है और ऊर्जा का स्तर बनाए रखती है।

ज्वार और जौ: गर्मियों में ज्वार और जौ की रोटियां तासीर में ठंडी होती हैं, जो पेट को ठंडक प्रदान करती हैं और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखती हैं।

रागी: कैल्शियम से भरपूर रागी की रोटी बच्चों और बुजुर्गों की हड्डियों की मजबूती के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है।

हालांकि गेहूं सबसे आम है, लेकिन इसे अन्य अनाजों के साथ मिलाकर (मल्टीग्रेन) खाना ज्यादा फायदेमंद होता है।

पोषण का पावरहाउस


मोटे अनाजों (Millets) में गेहूं के मुकाबले फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो वजन घटाने और शुगर कंट्रोल करने में सहायक है।

पारंपरिक अनाज ग्लूटेन-मुक्त होते हैं, जिससे पेट फूलने और गैस जैसी समस्याएं नहीं होतीं।

स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण अब बाजारों और होटलों में भी इन अनाजों की मांग बढ़ रही है। अपनी डाइट में धीरे-धीरे इन बदलावों को शामिल करना भविष्य में आपको गंभीर बीमारियों से बचा सकता है।

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