बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजनों को बहुत ही कम पेंशन मिल रहा है। इस मुद्दे पर हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए बताया गया है कि दिव्यांगजनों को जीविकोपार्जन के लिए सरकार की ओर से मात्र 291 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है। यह राशि आम नागरिक के एक दिन के खर्च के बराबर भी नहीं है। ऐसे में दिव्यांगजनों के लिए जीवन यापन करना बेहद कठिन हो गया है।
दिव्यांगों को मिल रही सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इस पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 23 अप्रैल तक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता ऋतिक शर्मा ने अपनी अधिवक्ता हमीदा सिद्दीकी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए दावा किया है कि प्रदेश में 22 हजार से अधिक दिव्यांगजन गंभीर उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। याचिका में संसद में पूछे गए सवालों से जुड़े आंकड़ों का हवाला भी दिया गया है।
याचिका में यह भी बताया गया कि दिव्यांगजनों को जीविकोपार्जन के लिए सरकार की ओर से मात्र 291 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है। यह राशि आम नागरिक के एक दिन के खर्च के बराबर भी नहीं है। ऐसे में दिव्यांगजनों के लिए जीवन यापन करना बेहद कठिन हो गया है।
दिव्यांग बच्चे RTE के तहत पंजीकृत नहीं..!
दिव्यांगजनों को आवश्यक सहायक उपकरण जैसे व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र या अन्य संसाधन खुद खरीदने पड़ते हैं, जो उनके लिए संभव नहीं है। याचिका में एक और गंभीर पहलू उजागर किया गया है कि राज्य में एक भी दिव्यांग बच्चा शिक्षा का अधिकार कानून के तहत स्कूल में नामांकित नहीं है।
कोर्ट ने इन सभी बिंदुओं पर राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी, जहां सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।



