मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में पिछले पांच कारोबारी सत्रों से जारी बढ़त के सिलसिले पर गुरुवार को अचानक विराम लग गया। बिकवाली के भारी दबाव के चलते सेंसेक्स अपने दिन के निचले स्तर पर पहुंचते हुए करीब 1,000 अंक टूटकर 76,558 के स्तर पर बंद हुआ।
वहीं, निफ्टी में भी 255 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 23,740 के स्तर से नीचे खिसक गया। इस अचानक आई गिरावट से निवेशकों के पोर्टफोलियो में भारी कमी आई है। विशेष रूप से आईटी और सीमेंट क्षेत्र के दिग्गज शेयरों जैसे इंफोसिस, एचसीएल टेक और अल्ट्राटेक सीमेंट में 2 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई।
बाजार में गिरावट के मुख्य कारण
वैश्विक शांति समझौते पर अनिश्चितता
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की उम्मीदों का कमजोर पड़ना है। ईरान द्वारा अमेरिका और इजराइल पर समझौते के उल्लंघन के आरोपों के बाद मध्य पूर्व में तनाव फिर से बढ़ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के व्यापार के लिए खुलने में हो रही देरी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी ने निवेशकों के उत्साह को ठंडा कर दिया है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
युद्धविराम की खबरों के बीच जो कच्चा तेल 95 डॉलर के नीचे आ गया था, वह तनाव बढ़ने की आशंका से दोबारा महंगा होने लगा है। ब्रेंट क्रूड 2 प्रतिशत की तेजी के साथ 96.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार पर दबाव बढ़ गया है।
वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेत
शांति समझौते पर संशय के कारण केवल भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के अन्य प्रमुख बाजार जैसे जापान का निक्केई और चीन का शंघाई कंपोजिट भी लाल निशान में बंद हुए। अमेरिकी वायदा बाजार से मिल रहे कमजोर संकेतों ने भी घरेलू निवेशकों का मनोबल प्रभावित किया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने का सिलसिला जारी है। पिछले 26 सत्रों से विदेशी निवेशक लगातार बिकवाल बने हुए हैं, जिससे बाजार में तरलता का अभाव दिख रहा है।
रुपये में कमजोरी
शुरुआती रिकवरी के बाद भारतीय रुपया एक बार फिर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे कमजोर होकर 92.70 के स्तर पर आ गया। वैश्विक दबाव के चलते रुपये की इस गिरावट ने बाजार की धारणा को और कमजोर कर दिया है।
बड़े स्तर पर मुनाफावसूली
अप्रैल के शुरुआती पांच दिनों में सेंसेक्स में लगभग 5,600 अंकों की भारी बढ़त दर्ज की गई थी। बाजार के ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने अपना मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू की, जिसे तकनीकी भाषा में प्रॉफिट बुकिंग कहा जाता है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि फिलहाल बाजार की दिशा मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर टिकी है। यदि शांति समझौता प्रभावी रहता है, तो रिकवरी की उम्मीद है। हालांकि, मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए विशेषज्ञों ने निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय धैर्य रखने और गिरावट के समय अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों पर ध्यान देने की सलाह दी है।



