टीआरपी। रायपुर नगर निगम की सामान्य सभा में शुक्रवार को किरण बिल्डिंग के स्वामित्व और मुआवजे को लेकर चल रहे 25 साल पुराने विवाद पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया। महापौर मीनल चौबे ने इस संवेदनशील मामले में तकनीकी पेच को देखते हुए इसे शासन के पास मार्गदर्शन के लिए भेजने का निर्णय लिया है।
यह मामला सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है, जिससे ट्रैफिक और स्थानीय व्यापारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं। शासन के हस्तक्षेप से दशकों पुराने इस कानूनी और प्रशासनिक विवाद के सुलझने की उम्मीद जगी है।
हंगामे के बीच टला फैसला और नामकरण पर चर्चा
पिछले दिनों स्थगित हुई सामान्य सभा शुक्रवार को दोबारा शुरू हुई, जिसमें कुल 17 प्रस्ताव पटल पर रखे गए। इनमें सबसे प्रमुख किरण बिल्डिंग का मुद्दा था। सड़क चौड़ीकरण के दौरान विस्थापित हुए व्यापारी कन्हैयालाल खेमानी और निगम के बीच जमीन को लेकर कोर्ट में मामला लंबित है। लंबी चर्चा के बाद महापौर ने स्पष्ट किया कि प्रशासन से जवाब आने के बाद ही इसे अगली सभा में रखा जाएगा।
वहीं, कोतवाली चौक का नाम जैन स्तंभ करने के प्रस्ताव पर पक्ष-विपक्ष में आम सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद इस प्रस्ताव को विलोपित (हटा) कर दिया गया। हालांकि, शहर की अन्य सड़कों और चौकों के नामकरण संबंधी अन्य प्रस्तावों को सदन ने पारित कर दिया है।
पूर्व महापौर बंगला अब बनेगा ED का अस्थाई दफ्तर
सभा के दौरान नलघर स्थित निगम की संपत्ति (पूर्व महापौर निवास) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अस्थाई कार्यालय के लिए सौंपने पर जमकर हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने निगम की संपत्ति केंद्रीय एजेंसी को देने का विरोध किया। इस पर महापौर ने दलील दी कि जब तक ED का अपना नया भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक यह आवंटन केवल अस्थाई तौर पर किया गया है।
विवाद की अवधि: किरण बिल्डिंग का मामला पिछले 25 वर्षों से लंबित है।
प्रस्तावों की संख्या: सामान्य सभा में कुल 17 प्रस्ताव चर्चा के लिए रखे गए।
अस्थाई आवंटन: पूर्व महापौर बंगला ED को तब तक दिया जाएगा जब तक उनका नया भवन निर्मित नहीं हो जाता।
क्या है किरण बिल्डिंग का मामला
उल्लेखनीय है कि बरसों पहले जयस्तंभ चौक का चौडीकरण करने के लिए चौक के किनारे स्थित किरण बिल्डिंग को मुख्य मार्ग से हटाकर पीछे स्थानांतरित किया गया था। किरण बिल्डिंग के पीछे कन्हैयालाल छुगानी की रजिस्ट्रीशुदा भूमि पैराडाइज के समानांतर थी। किरण बिल्डिंग के व्यवस्थापन हेतु पैराडाईज को सामने की ओर भूमि आबंटित की गई थी किंतु कन्हैयालाल छुगानी को पीछे की ओर मालवीय रोड पर भूमि आबंटित की गई थी। बाद में यह मामला अदालत में विचाराधीन रहा।
नगर निगम अब किरण बिल्डिंग मामले में राज्य शासन की राय का इंतजार करेगा। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद ही अगली सामान्य सभा में इस पर कोई ठोस निर्णय लिया जा सकेगा, जिससे व्यापारी और निगम के बीच का गतिरोध समाप्त हो सके।


