खरगोन: वायरल गर्ल मोनालिसा भोंसले और फरमान खान के निकाह मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जिस मोनालिसा को बालिग बताकर विवाह कराया गया था, सरकारी जांच में वह नाबालिग निकली है। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है और पुलिस ने आरोपी फरमान खान के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।

72 घंटे में सामने आया सच

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के निर्देश पर एक विशेष टीम ने इस मामले की पड़ताल की। जांच दल ने महज तीन दिनों के भीतर केरल से लेकर मध्य प्रदेश के गांवों तक के रिकॉर्ड खंगाले। शुरुआत केरल के उस मंदिर और ग्राम पंचायत से हुई जहां शादी का रजिस्ट्रेशन हुआ था। वहां पता चला कि महेश्वर नगर पालिका के एक जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर मोनालिसा को बालिग बताया गया था।

हालांकि, जब टीम ने महेश्वर के सरकारी अस्पताल के मूल रिकॉर्ड की जांच की, तो सच कुछ और ही निकला। अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक, मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था। इस लिहाज से 11 मार्च 2026 को हुई शादी के वक्त उसकी उम्र महज 16 साल 2 महीने थी।

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साजिश और रसूख का कनेक्शन

आयोग के सामने यह दलील दी गई कि यह सिर्फ एक निकाह नहीं, बल्कि एक खास नैरेटिव सेट करने की सोची-समझी साजिश थी। मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता प्रथम दुबे ने आयोग को बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में केरल के कुछ नेताओं और प्रतिबंधित संगठन पीएफआई (PFI) से जुड़े लोगों की भूमिका संदिग्ध है। आरोप है कि लड़की की उम्र छिपाने के लिए महेश्वर नगर पालिका से गलत जन्म प्रमाण पत्र बनवाया गया था, जिसे अब निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जाति प्रमाण पत्र से खुली पोल लड़की के माता-पिता ने आयोग को अपने जाति प्रमाण पत्र भी सौंपे हैं। इससे यह साबित हो गया कि मोनालिसा पारधी जनजाति समुदाय से आती है, जो अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल है। इसी आधार पर अब मामले में एट्रोसिटी एक्ट भी जोड़ा गया है।

अब आगे क्या?

प्रशासनिक सख्ती के बाद महेश्वर थाने में फरमान खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब उन लोगों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार करने और इस अवैध विवाह को अंजाम देने में मदद की। आयोग ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी नाबालिग के साथ ऐसी साजिश न हो सके।

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