बिलासपुर। भाटापारा नगरपालिका में राजस्व उपनिरीक्षक पद पर हुई नियुक्ति को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। अदालत ने पाया कि चयन प्रक्रिया में पक्षपात और मनमानी की आशंका स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, खासकर तब जब चयनित अभ्यर्थी का अनुभव प्रमाण पत्र उसके पिता द्वारा जारी किया गया था।

भाटापारा (जिला बलौदाबाजार-भाटापारा) नगरपालिका ने वर्ष 2012 में राजस्व उपनिरीक्षक के पद के लिए आवेदन मंगाए थे। इसके लिए स्नातक और पीजीडीसीए अनिवार्य योग्यता रखी गई थी। स्थानीय निवासी देवेन्द्र कुमार साहू ने समय पर आवेदन किया, लेकिन पात्र और अपात्र सूची में उनका नाम शामिल ही नहीं किया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से पेश दस्तावेजों में बताया गया कि सूचना का अधिकार कानून के तहत प्राप्त जानकारी से यह स्पष्ट हुआ कि उनका आवेदन प्राप्त हुआ था, इसके बावजूद उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।

मामले में चयनित अभ्यर्थी सतीश सिंह चौहान के पिता उसी समय नगर परिषद में मुख्य नगर पालिका अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। अदालत ने यह भी नोट किया कि अनुभव प्रमाण पत्र भी पिता द्वारा ही जारी किया गया था ।

See also  हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को दिया झटका, शीरा नियंत्रण और विनियमन नियम को अधिकार-क्षेत्र से किया बाहर, गुड़ाखू उत्पादकों ने दी थी चुनौती

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने कहा कि पात्र/अपात्र सूची से किसी योग्य अभ्यर्थी को बाहर रखना गंभीर त्रुटि है और इससे पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती है।

हाईकोर्ट ने 23 मार्च 2013 की नियुक्ति को निरस्त करते हुए निर्देश दिया है कि नई, निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाए। साथ ही, याचिकाकर्ता देवेन्द्र कुमार साहू के आवेदन पर उचित विचार करते हुए नया नियुक्ति आदेश जारी करने को भी कहा गया है।