Hormuz crisis: नई दिल्ली/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और ईरान संकट के बीच मंगलवार 14 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर लगभग 40 मिनट तक अहम बातचीत हुई। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस उच्चस्तरीय वार्ता की पुष्टि करते हुए बताया कि इस साल दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी टेलीफोनिक बातचीत है।

Hormuz crisis: बता दें यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद से क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनी हुई है। हालांकि वर्तमान में 22 अप्रैल तक के लिए एक अनिश्चित युद्धविराम लागू है।

Hormuz crisis: लेकिन, पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रहने के कारण सैन्य गतिरोध बना हुआ है। पीएम मोदी और ट्रंप ने इस सैन्य गतिरोध को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के विकल्पों पर चर्चा की।

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Hormuz crisis: बता दें कि वैश्विक राजनीति में आज भारत दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जिसके संबंध इजरायल और अमेरिका के साथ जितने मजबूत हैं, उतने ही गहरे संबंध ईरान और खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब) के साथ भी हैं। भारत की यह संतुलित कूटनीति उसे एक अलग लीग में लाकर खड़ा करती है।

Hormuz crisis: ऐसे में जबकि दुनिया दो धड़ों में बंट रही है, पीएम मोदी का प्रभाव दोनों पक्षों पर समान रूप से है। होर्मुज की नाकेबंदी का सबसे बुरा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है। ऐसे में ट्रंप का सीधे नई दिल्ली फोन मिलाना यह संदेश है कि दक्षिण एशिया का असली नेतृत्व और वैश्विक संकटों का समाधान भारत के पास ही है।