नई दिल्ली/तेहरान। मध्य पूर्व में तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति की हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के समुद्री इलाके में सख्त नाकाबंदी कर रखी है। सोमवार से लागू हुई इस कार्रवाई के तहत अब तक ईरान के बंदरगाहों से निकलने की कोशिश कर रहे 10 जहाजों को वापस लौटा दिया गया है। बुधवार को अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर ‘USS स्प्रूएंस’ ने भी एक ईरानी जहाज को रोककर वापस भेजा।
ईरान ने दी व्यापार ठप करने की चेतावनी
अमेरिका की इस घेराबंदी पर कड़ा रुख अपनाते हुए तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि नाकाबंदी तुरंत नहीं हटाई गई, तो वह समूचे खाड़ी (Gulf) क्षेत्र में समुद्री व्यापार को बाधित कर सकता है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का संकेत देते हुए कहा है कि आज इजरायल और लेबनान के नेता युद्ध समाप्त करने के लिए सीधी बातचीत करेंगे। 1991 की मैड्रिड कॉन्फ्रेंस के बाद, यानी पिछले 34 वर्षों में यह पहला मौका है जब दोनों देशों के शीर्ष नेता आमने-सामने बैठेंगे।
समझौते की ओर बढ़ते कदम, पाकिस्तान बना मध्यस्थ
अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका और ईरान 21 अप्रैल को समाप्त हो रहे संघर्षविराम (सीजफायर) से पहले एक समझौते के करीब पहुंच रहे हैं। हालांकि कुछ मतभेद अब भी बने हुए हैं, लेकिन बातचीत सकारात्मक दिशा में है। इस दौरान तेहरान में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई है, जिसमें पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि मुनीर अमेरिका का विशेष संदेश लेकर पहुंचे हैं। इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और कुशनर संभाल रहे मोर्चा
शांति प्रक्रिया को अमली जामा पहनाने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ के साथ मिलकर ड्राफ्ट प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, डील को अंतिम रूप देने के लिए सीजफायर की अवधि बढ़ाई जा सकती है, हालांकि अमेरिका ने अभी इस पर औपचारिक सहमति नहीं जताई है।


