टीआरपी। छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 के पहले चरण को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक कसावट तेज कर दी है। इसके तहत अब जिले के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बिना कलेक्टर की लिखित अनुमति के अवकाश नहीं दिया जाएगा।
यह निर्णय सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करेगा क्योंकि जनगणना एक विशाल प्रक्रिया है जिसमें हजारों शिक्षकों और सरकारी कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है। छुट्टियों पर इस सख्ती का उद्देश्य डेटा संग्रह की शुद्धता सुनिश्चित करना और केंद्र द्वारा तय की गई समय सीमा (Deadlines) का पालन करना है।
जनगणना की तैयारियों पर पैनी नजर
राज्य शासन के निर्देशानुसार, जनगणना 2027 के प्रथम चरण के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर सहित सभी जिलों में प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है। फील्ड वर्क के दौरान कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों के प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने स्तर पर अवकाश स्वीकृत न करें।
किसी भी आपात स्थिति में यदि कर्मचारी को छुट्टी की आवश्यकता होती है, तो उसे उचित कारणों के साथ अपना आवेदन सीधे जिला कलेक्टर या संबंधित नोडल अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
जनगणना 2027 के पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करना और हाउसिंग सेंसस का कार्य शामिल है।
छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में जनगणना कार्य के लिए विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए जा रहे हैं।
आने वाले हफ्तों में ब्लॉक स्तर पर कर्मचारियों का सघन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि मानसून की शुरुआत से पहले डिजिटल डेटा एंट्री का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आवाजाही की समस्या आड़े न आए।



