वाशिंगटन/इस्लामाबाद: दुनिया के सबसे खतरनाक संघर्षों में से एक अब खत्म होने की कगार पर दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि ईरान अपना यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए ट्रम्प ने साफ किया कि दोनों देश एक ऐतिहासिक शांति समझौते के बेहद करीब हैं।

समझौते की टेबल पर ईरान और अमेरिका

दरअसल, व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प काफी उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा, “बातचीत बहुत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और समझौते की पूरी संभावना है। ट्रंप ने आगे कहा कि, डील होते ही दुनिया भर में तेल की सप्लाई फिर से सुचारू हो जाएगी। तनाव की वजह से बंद होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा और समुद्री व्यापार सामान्य होगा। सबसे दिलचस्प बात यह कि अगर समझौता इस्लामाबाद में होता है, तो ट्रम्प पाकिस्तान की यात्रा भी कर सकते हैं। हालांकि, ईरान के सरकारी मीडिया ने ट्रम्प के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरानी मीडिया का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति सिर्फ ‘हवाई किले’ बना रहे हैं और जमीनी हकीकत कुछ और है।

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इजराइल-लेबनान के बीच 10 दिन का सीजफायर

मैदानी सूत्रों ने बताया कि मिडिल ईस्ट से एक और बड़ी खबर आई है। इजराइल और लेबनान 10 दिन के युद्धविराम (सीजफायर) पर राजी हो गए हैं। ट्रम्प ने खुद ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। यह युद्धविराम भारतीय समयानुसार गुरुवार देर रात 3:30 बजे से लागू हो चुका है। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजराइल के पीएम नेतन्याहू से लंबी बातचीत के बाद यह सहमति बनी है।

क्या है यूरेनियम का गणित? (Explainer)

बता दें कि यूरेनियम से परमाणु ऊर्जा भी बनती है और परमाणु बम भी, बस फर्क एनरिचमेंट (शुद्धिकरण) का है। प्राकृतिक यूरेनियम में काम का हिस्सा कम होता है, जिसे मशीनों (सेंट्रीफ्यूज) के जरिए शुद्ध किया जाता है। IAEA की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास 5 से 6 टन एनरिच्ड यूरेनियम है। हथियार बनाने के लिए 90% एनरिचमेंट जरूरी है। ईरान फिलहाल 120-130 किलो यूरेनियम को 60% तक शुद्ध कर चुका है।
यही वजह है कि अमेरिका और इजराइल लगातार दबाव बना रहे हैं कि ईरान अपना यह भंडार सौंप दे, ताकि परमाणु हमले का खतरा टाला जा सके।

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