कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से लगातार दूसरा बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी ट्रांजिट अग्रिम जमानत की अवधि मंगलवार तक बढ़ाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने स्पष्ट किया कि खेड़ा को अब संबंधित क्षेत्राधिकार (असम) की अदालत में ही जाकर राहत मांगनी होगी।

सिंघवी ने दी थी ये दलील

पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में दलील दी थी कि तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गई ट्रांजिट बेल आज (शुक्रवार) खत्म हो रही है और अदालतें अब सोमवार को खुलेंगी। उन्होंने मांग की थी कि सोमवार को असम हाईकोर्ट पहुँचने तक के लिए उनकी राहत बरकरार रखी जाए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने कहा कि यदि संबंधित कोर्ट में काम नहीं हो रहा है, तो मौजूदा प्रक्रिया के तहत विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल ट्रांजिट बेल पर लगी रोक को हटाने या अवधि बढ़ाने का कोई आधार नहीं है।

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क्यों बढ़ा विवाद?

यह मामला तब कानूनी पेचीदगियों में फंस गया जब असम में दर्ज एफआईआर के लिए पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया।

  • असम सरकार की आपत्ति: सॉलिसिटर जनरल ने इसे ‘फोरम शॉपिंग’ बताया था, क्योंकि मामला असम का है और खेड़ा ने राहत के लिए हैदराबाद को चुना।
  • सुप्रीम कोर्ट की रोक: बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर हैरानी जताई थी और हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।

क्या है पूरा मामला?

पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर गंभीर आरोप लगाए थे:

  • आरोप था कि उनके पास कई देशों के पासपोर्ट और संपत्तियां हैं।
  • इसके बाद रिंकी भुइयां ने गुवाहाटी में मानहानि और धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई।

अब आगे क्या होगा?

ट्रांजिट बेल की मियाद खत्म होने और सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब पवन खेड़ा के पास केवल एक ही रास्ता बचा है- उन्हें गुवाहाटी (असम) जाकर निचली अदालत या हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल करनी होगी। इस दौरान उन पर गिरफ्तारी का कानूनी खतरा बना रहेगा।

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