रायपुर। शिक्षा के अधिकार RTE के तहत प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की फीस, प्रतिपूर्ति राशि को लेकर छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच मामला सुलझ नहीं पा रहा है। राज्य सरकार के खिलाफ असहयाेग आंदोलन करने वाले एसोसिएशन ने प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोत्तरी नहीं किए जाने से नाराज होकर आज प्रदेशभर में प्राइवेट स्कूलों में तालाबंदी कर दी है।
छत्तीसगढ़ में आरटीई RTE के तहत मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग को लेकर निजी स्कूलों का विरोध तेज हो गया है। आज पूरे प्रदेश के निजी स्कूल बंद रखे गए हैं। स्कूल संचालकों का कहना है, लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है।
गौरतलब है कि बंद से एक दिन पहले निजी स्कूल संचालकों, शिक्षकों और स्टाफ ने काली पट्टी बांधकर काम किया और शासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन प्रतीकात्मक था, लेकिन इसके जरिए सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की गई।
छत्तीसगढ़ निजी विद्यालय प्रबंधन संघ के नेतृत्व में एक मार्च से असहयोग आंदोलन जारी है। एसोसिएशन का कहना है, बार-बार मांग रखने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे संचालकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
एसोसिएशन ने साफ कहा है, यदि फीस प्रतिपूर्ति में वृद्धि नहीं की गई, तो लॉटरी के माध्यम से चयनित आरटीई छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह फैसला शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।
स्कूल शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र
स्कूल शिक्षा मंत्री व विभाग के अफसरों को पत्र लिखकर एसोसिएशन ने कहा है, 13 अप्रैल को शिक्षा विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति में इस बात का उल्लेख है, शिक्षा के अधिकार कानून में प्रतिपूर्ति राशि का निर्धारण शासकीय विद्यालय में प्रति विद्यार्थी होने वाले व्यय या निजी स्कूल की वास्तविक फीस (दोनों में से जो भी कम हो) प्रतिपूर्ति राशि निर्धारण का आधार होगा। शिक्षा के अधिकार कानून की धारा 12 की उपधारा 2 में भी प्रतिपूर्ति राशि निर्धारण में इस नियम का उल्लेख है।
स्कूल शिक्षा विभाग इस वर्ष शासकीय स्कूलों में होने वाली प्रति विद्यार्थी राशि को सार्वजनिक करें ताकि निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि का निर्धारण हो सके, क्योंकि प्रतिपूर्ति राशि का पुननिर्धारण 2011 से अब तक नहीं हुआ है।


