टीआरपी डेस्क। श्रीनगर समेत कश्मीर घाटी में शनिवार सुबह 8.24 बजे भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 5.3 मापी गई।
आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का बदाखशान प्रांत था और यह जमीन से 190 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। राहत की बात यह रही कि अब तक घाटी से जान-माल के किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
भूकंपीय दृष्टि से कश्मीर घाटी एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह क्षेत्र हाई सिस्मिक जोन में आता है, जहां अतीत में भी भारी तबाही देखी गई है।
8 अक्टूबर 2005 को आए 7.6 तीव्रता के भूकंप ने सीमावर्ती उरी और पीओके के मुजफ्फराबाद में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें 80 हजार से अधिक लोगों की जान गई थी। इतिहास में भी 1555 और 1885 के दौरान आए विनाशकारी भूकंपों ने यहां बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है।
भूकंप विशेषज्ञों और स्ट्रक्चरल इंजीनियरों ने घाटी के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमेंट-कंक्रीट से बनी बहुमंजिला इमारतें भूकंप के झटकों के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं।
ऐसे में जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए कश्मीर में पारंपरिक और भूकंप-रोधी तकनीक से मकान बनाने की वकालत की गई है। अधिकारियों ने लोगों से सुरक्षित इमारतों के निर्माण और भूकंप के समय सावधानी बरतने की अपील की है।


